Sunday, August 2, 2009

क्या 16 की लड़की सेक्स के लिए सहमति दे सकती है?

क्या 16 की लड़की सेक्स के लिए सहमति दे सकती है? और क्या इस सहमति को वैध समझा जाना चाहिए? इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच का कहना है कि इस उम्र में लड़की को शारीरिक और मानसिक रूप से सेक्स के लिए सहमति देने लायक नहीं समझा जा सकता, इसलिए इस सहमति को जायज नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस वी. डी. चतुर्वेदी ने अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया और यूपी के अडवोकेट जनरल को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या केंद्र और राज्य सरकारें सेक्स के लिए सहमति की उम्र को 16 से बढ़ाकर 18 करना चाहती हैं। कोर्ट ने यह बात एक रेप केस की सुनवाई के दौरान कही। रेप के एक दोषी ने हाई कोर्ट में अपील की थी। उसे रेप के इल्जाम में 7 साल की कैद की सजा हुई है। दोषी का कहना है कि रेप के वक्त लड़की की उम्र 17 साल थी और उसने शारीरिक संबंध सहमति से बनाए थे। इस आधार पर दोषी ने दी गई सजा को चैलेंज किया था। लेकिन कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट का कहना था कि लड़की की सहमति मर्जी से नहीं दी गई थी। सेक्स के लिए लड़की की जायज सहमति की उम्र के लिए 16 साल पर सवाल उठाते हुए जज ने संसद में पास हुए अलग-अलग बिल और कानूनों को आधार बनाया है। इनमें हिंदू माइनॉरिटी ऐंड गार्जियनशिप ऐक्ट, चाइल्ड मैरिज ऐक्ट और जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट शामिल है। कोर्ट के मुताबिक इन सभी में लड़की की बालिग उम्र 18 या 21 साल मानी गई है। लेकिन आईपीसी के सेक्शन 375 और 361 के तहत लड़की की बालिग उम्र 16 साल है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान नीति निर्देशक सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ तो लड़की को 18 साल की उम्र से पहले शादी के लिए बालिग नहीं माना जाता और दूसरी तरफ 16 साल की बच्ची को सेक्स के लिए सहमति देने लायक मान लिया जाता है।

3 comments:

Aadarsh Rathore said...

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अगर यह पोस्ट टिप्पणी प्राप्त करने के लिए लिखी गई है तो यह रही पहली टिप्पणी मेरी तरफ से

aman said...

कहाँ हैं आप?

आज सोलह तो क्या १२-१३ साल के बच्चे अपनी मर्ज़ी से सम्बन्ध बना रहे हैं. बच्चे काफी छोटी उम्र में ही आजकल बड़े कामों को अंजाम दे रहे हैं, लोग बड़े खुश होते हैं जब उनका बच्चा या बच्ची छोटी उम्र में कोई कठिन सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर की समस्या सुलझा लेता है, या कोई नया गणित का सूत्र खोज लेता है या कोई अविष्कार कर डालता है. बच्चे आजकल समय से पहले ही बहुत होशियार हो गए हैं, जो काम पहले केवल प्रौढों की मिलकियत माने जाते थे उन्हें भी आज बच्चे कहीं अधिक दक्षता से कर लेते हैं. बच्चों में परिपक्वता आएगी तो हर क्षेत्र में आएगी, हम आखिर सेक्स को नज़रंदाज़ या नापसंद क्यों करते हैं? आज के किशोर अपना भला बुरा चालीस पचास के बुजुर्गों से बेहतर समझते हैं, वे अपने आसपास के माहौल और देश दुनिया के प्रति पिछली पढ़ी से ज्यादा सजग हैं.

फिर समय से पहले ही होशियारी आ रही है तो इच्छाएं और भावनात्मक परिपक्वता भी समय से पहले सब साथ में जल्दी आ रही है. सब कामों में बच्चों का आगे आना मंजूर है तो सेक्स में क्यों नहीं? हमारा समाज युवाओं को इतनी आसानी से स्वतंत्रता नहीं देना चाहता.

मेरा तो कहना है की अब 13 साल से बड़े बच्चों को अपने जीवन सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाना चाहिए. उन्हें वोट डालने और सेक्स की सहमती देने का भी अधिकार होना चाहिए.

आज के किशोर उतने मासूम नहीं रहे जितने की पिछली पीढियों के हुआ करते थे, आज न उन्हें परिवार के बंधन और रोकटोक पसंद हैं न ही अपनी सेक्सुआलिटी पर पहरे.

बलात्कार गलत है पर इच्छा से बनाये गए संबंधों पर किसी तीसरे की तानाशाही नहीं चलनी चाहिए.

arun prakash said...

आज कल के बच्चे बडो बडो के कान काट रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की वे हमारे बाप हो गए हैं आखिर इसी प्रकरण में ऍफ़ आई आर पिता ने ही तो समझ कर ही कराया होगा ताकि उसकी बेटी को न्याय मिल सके
किसी भी युग में पीढियों का अंतर्द्वंद इतना व्यापक नहीं था जितना आज कल है लेकिन हमें इस कदर पलायनवादी सोच भी नहीं रखनी चाहिए