Monday, December 29, 2014

राष्ट्रीय मासिक वेतन 15,000 रुपए करने की तैयारी में

केंद्र सरकार देश के औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में राष्ट्रीय मासिक वेतन 15,000 रुपए करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत 45 तरह की आर्थिक गतिविधियों को इस एक्ट में सूचीबद्ध किया गया और इसी एक्ट को राज्यों में भी लागू किया गया। हालांकि, राज्य 1,600 प्रकार के आर्थिक गतिविधियों को इस एक्ट के तहत ला सकते हैं।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय इसके लिए जल्द ही सभी राज्यों की बैठक बुलाने वाला है जिसमें इस एक्ट में संशोधन के लिए सभी राज्यों की राय जानी जाएगी। वहीं, एक इंटर मिनिस्टीरियल कमिटी इस पर पहले से ही काम कर रही है। इसमें संशोधन के बाद सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतनमान तय कर दिया जाएगा, जिसे सभी राज्यों को लागू करना होगा।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने श्रम मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अरुण कुमार सिन्हा का बयान प्रकाशित किया है जिसमें सिन्हा ने कहा, 'न्यूनतम वेतनमान अधिनियम में संशोधन कर इसमें एक प्रावधान जोड़ा जाएगा जिसके तहत राष्ट्रीय दर राज्यों के लिए भी जरूरी होंगे। अब तक यह राज्यों के लिए सलाह तक ही सीमित थे लेकिन अब इनका पालन आवश्यक कर दिया जाएगा।'
केंद्र सरकार के न्यूनतम तनख्वाह को 15,000 रुपए करने के कदम से राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत आने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह करीब दोगुनी हो जाएगी। अभी न्यूनतम वेतनमान 4,645 रुपए है।
सरकारी अधिकारियों की मानें तो ऐसा होने से अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को खास तौर पर फायदा पहुंचेगा। यहां कर्मचारियों में असंतोष पैदा होने के आसार कम होंगे। इन क्षेत्रों में वेतनमान कम होने की वजह से कर्मचारी हमेशा अपनी कंपनी बदलते रहते हैं। लेकिन, वेतनमान बढ़ने से जॉब बदलने की परिपाटी में भी कमी आने की संभावना है।
दूसरी ओर श्रम क्षेत्रों पर नजर रखनेवाले विशेषज्ञों को इस बदलाव की कामयाबी को लेकर तमाम आशंकाएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका में ऐसा नियम आने पर तो वहां यह तुरंत लागू हो जाता है और कर्मचारियों की सैलरी बढ़ भी जाती है, लेकिन भारत में मौजूद कई व्यवस्थागत खामियों की वजह से व्यवहार में इसे लागू करना आसान नहीं होगा।

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