Thursday, April 16, 2009

स्कूलों में सेक्स शिक्षा नहीं होनी चाहिए।

स्कूलों में सेक्स शिक्षा की शुरुआत का एक संसदीय समिति ने विरोध किया है। इस समिति ने सलाह
दी है कि बायॉलजी के सिलेबस में उचित चैप्टर जोड़ दिए जाएं। यह काम भी प्लस टू से पहले नहीं होना चाहिए। पिटिशंस पर बनी राज्यसभा की समिति ने कहा है कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा नहीं होनी चाहिए। बीजेपी नेता वेंकैया नायडू की अध्यक्षता वाली समिति के मुताबिक, स्कूली बच्चों को यह बात उचित ढंग से बताई जानी चाहिए कि शादी से पहले सेक्स संबंध नहीं होने चाहिए, क्योंकि यह अनैतिक और अस्वस्थ है। छात्रों को इस बात के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए कि वैवाहिक संबंधों से अलग हटकर सेक्स सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ है। समिति ने सुझाव दिया है कि उम्र के मुताबिक वैज्ञानिक ढंग से स्वास्थ्य शिक्षा, नैतिक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण के लिए उचित पाठ्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए। हायर क्लास में एचआईवी/एड्ज के बारे में उचित चैप्टर बायॉलजी के सिलेबस में जोड़ा जाना चाहिए। कमिटी ने कहा है कि 'किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक विकास' और 'एचआईवी/एड्ज और सेक्स संचारित अन्य रोग' जैसे चैप्टर हटाकर इन्हें टेन प्लस टू स्टेज में जोड़ा जाना चाहिए। नया सिलेबस सभी स्कूलों में लागू करने से पहले मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में सहमति के लिए पेश किया जाना चाहिए।

1 comment:

Anil said...

ये राजनीतिज्ञ कौन होते हैं ऐसा फैसला लेने वाले? जनता से क्यों नहीं राय ली जाती?