Wednesday, April 2, 2014

कांग्रेस के लिए साउथ इंडिया से कुछ राहत की खबर

चुनावी सर्वे के नतीजों से परेशान रहने वाली कांग्रेस के लिए साउथ इंडिया से कुछ राहत की खबर है। कर्नाटक में बीजेपी पर कांग्रेस भारी पड़ने वाली है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली बढ़त को लोकसभा चुनाव में कायम रख सकती है। सीएनएन-आईबीएन-सीएसडीएस-लोकनीति-द वीक इलेक्शन ट्रैकर और चेन्नै मैथमेटिकल इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राजीव करंधिकर के सीट प्रोजेक्शन के मुताबिक लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां 12 से 18 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। बीजेपी को 7-12 सीटें और जेडीएस को 1-4 सीटों पर कामयाबी मिल सकती है। इस सर्वे में एक दिलचस्प बात यह सामने आई है कि 28 लोकसभा सीटों वाले कर्नाटक में आम आदमी पार्टी खाता भी नहीं खोल पाएगी।
फरवरी के मुकाबले कर्नाटक में 4 पर्सेंट वोटों की बढ़त के साथ कांग्रेस को 46 पर्सेंट वोट मिलने का अनुमान है। फरवरी के मुकाबले बीजेपी को भी 4 पर्संट वोटों की बढ़त मिल रही है लेकिन उसे 36 पर्सेंट वोट पर ही संतोष करना पड़ सकता है। वहीं जेडीएस 6 पर्सेंट वोटों के नुकसान के साथ 12 पर्सेंट पर सिमट सकता है। आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियों 1 से 5 पर्सेंट वोट में सिमट सकती हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के चुनावी अभियान से दलितों, अल्पसंख्यकों और ओबीसी में कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ रही है। कांग्रेस को प्रदेश में इन्हीं समुदायों से भारी समर्थन मिल सकता है। वहीं बीजेपी को यहां अपर कास्ट और वर्चस्व वाली जातियों में समर्थन मिलता दिख रहा है। अपर कास्ट में 63 पर्सेंट लोगों ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही तो मात्र 28 पर्सेंट ही कांग्रेस के पक्ष में दिखे। लिंगायत समुदाय के 59 पर्सेंट लोगों ने बीजेपी पर भरोसा जताया। इस समुदाय से 28 पर्सेंट लोगों ने कांग्रेस को वोट देने की बात कही और महज 13 पर्सेंट लोगों ने जेडीएस पर भरोसा जताया।
ओबीसी में 53 पर्सेंट कांग्रेस के साथ, 30 पर्सेंट बीजेपी और 13 पर्सेंट जेडीएस के साथ जाने की बात कही। दलितों का बंपर भरोसा कांग्रेस के साथ बना हुआ है। 55 पर्सेंट दलितों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया तो सिर्फ 19 पर्सेंट दलितों को ही बीजेपी से उम्मीद है। जेडीएस के साथ 9 पर्सेंट दलित जा सकते हैं। मुस्लिमों के बीच तो कांग्रेस का ही परचम लहराने की उम्मीद है। 87 पर्सेंट मुस्लिमों ने कांग्रेस पर खुलकर भरोसा जताया। 10 पर्सेंट मुस्लिम बीजेपी और 3 पर्सेंट जेडीएस के साथ जा सकते हैं। आदिवासियों ने भी कांग्रेस पर ही भरोसा जताया। 52 पर्सेंट आदिवासी कांग्रेस के पक्ष में जा सकते हैं जबिक बीजेपी के साथ भी 44 पर्सेंट आदिवासी आ सकते हैं।
कर्नाटक में वोटर्स लिंग के आधार पर भी बंटे हुए हैं। महिलाओं के बीच कांग्रेस बेहद लोकप्रिय है। 51 पर्सेंट महिलाओं ने कांग्रेस को पसंद बताया तो 33 पर्सेंट महिलाओं को बीजेपी ज्यादा ठीक लग रही है। वहीं पुरुषों के बीच भी कांग्रेस पहली पसंद है। 41 पर्सेंट पुरुषों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया तो बीजेपी के साथ 39 पर्सेंट पुरुषों का भरोसा है।
सर्वे के मुताबिक 35 पर्सेंट वोटर येदयुरप्पा की BJP में वापसी के समर्थन में दिखे जबकि 54 पर्सेंट वोटर इसके खिलाफ नजर आए। यही सवाल जब BJP वोटरों से किया गया तो 50 पर्सेंट BJP वोटर ने इसका समर्थन किया जबकि 45 पर्सेंट BJP वोटरों इससे सहमत नहीं दिखे। बीएसआर कांग्रेस का BJP में विलय पर कुल 31 पर्सेंट वोटरों ने समर्थन किया जबकि 52 पर्सेंट वोटरों ने इसका विरोध किया।
कर्नाटक में 32 पर्सेंट लोगों की पसंद नरेंद्र मोदी, 27 पर्सेंट लोगों की पसंद राहुल गांधी, 8 पर्सेंट लोगों की पसंद सोनिया गांधी और 7 पर्सेंट लोगों की पसंद एचडी देवेगौड़ा हैं। तेलंगाना में राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी पीएम पद के लिए बराबर की पसंद हैं। मोदी और राहुल तेलंगाना में 21 पर्सेंट लोगों की पसंद हैं। हालांकि, सीमांध्र में नरेंद्र मोदी राहुल गांधी से बहुत आगे हैं। सीमांध्र में 30 पर्सेंट लोगों ने मोदी को पसंद बताया तो राहुल गांधी पर 3 पर्सेंट लोगों ने ही भरोसा जताया। सर्वे के मुताबिक केरल में राहुल गांधी पीएम पद के लिए पहली पसंद हैं। यहां 24 पर्सेंट लोगों ने राहुल गांधी को पीएम के लिए पहली पसंद बताया जबकि मोदी को 12 पर्सेंट लोगों ने ही पसंद किया। सबसे ज्यादा 55 पर्सेंट लोगों ने कहा कि इस मुद्दे पर फिलहाल उनकी कोई राय नहीं है। तमिलनाडु में 24 पर्सेंट लोग नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने के पक्ष में दिखे। जबकि 17 पर्सेंट लोग जयललिता को और 9 पर्सेंट लोग राहुल गांधी को पीएम बनाने के पक्ष में थे।
इस बार आंध्र प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस बुरी तरह से लाचार दिख रही है। ऐसे में कांग्रेस को 42 सीटों वाले प्रदेश में महज 4 से 8 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। चंद्रबाबु नायडू की टीडीपी इस बार आंध्र प्रदेश में लीड कर सकती है। टीडीपी को 13-19 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं 9-15 सीटों के साथ जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रह सकती है। टीआरएस को भी 4-8 सीटें मिल सकती हैं। अविभाजित आंध्र में टीडीपी 29 पर्सेंट वोट, वाईएसआर कांग्रेस को 21, कांग्रेस को 18, टीआरएस को 13, बीजेपी को 8 आप को 1 और अन्य को 10 पर्सेंट वोट मिलने का अनुमान है।
तंलगाना में कांग्रेस को 35 पर्सेंट वोट और टीआरएस को 34 पर्सेंट वोट मिल सकता है। वहीं बीजेपी को 10 पर्सेंट, टीडीपी को 13 और अन्य को 10 पर्सेंट वोट मिलने की उम्मीद है। अलग तेलंगाना राज्य बनाने का क्रेडिट लोग टीआरएस को दे रहे हैं। 37 पर्सेंट लोगों ने के. चंद्रेशखर राव और टीआरएस को तेलंगाना का क्रेडिट दिया। वहीं 21 पर्सेंट लोगों ने कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व को।
कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइडेट डेमोक्रेडिट फ्रंट(यूडीएफ) केरल में मजबूत स्थिति में रहेगा। यूडीएफ को 11-17 सीटों पर जीत मिल सकती है वही मुख्य विपक्षी सीपीएम के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट(एलडीएफ) को 4-8 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। बीजेपी और आम आदमी पार्टी यहां खाता खोलने में भी नाकाम रह सकती हैं। बीजेपी केरल में पिछले 20 सालों से खाता खोलने के जुगत में लगी है लेकिन हर बार नाकाम रहती है। यूडीएफ और एलडीएफ दोनों को 5 पर्सेंट वोटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यूडीएफ को 45 पर्सेंट वोट मिलने का अनुमान है तो एलडीएफ 36 पर्सेंट वोट पाकर दूसरे नंबर पर रह सकता है। बीजेपी को 11 पर्सेंट और आम आदमी पार्टी को 3 पर्सेंट वोट मिल सकता है।
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 32 पर्सेंट वोट एआईएडीएमके को मिलने का अनुमान है। इसके बाद 23पर्सेंट वोट डीएमके+ को, 22 पर्सेंट वोट बीजेपी+ को, 12 पर्सेंट वोट कांग्रेस को और 2 पर्सेंट वोट आप को मिलने के आसार हैं। 39 लोकसभा सीटों वाले तमिलनाडु में सत्ताधारी एआईएडीएमके को सबसे ज्यादा 15 से 21 सीटें मिलने का अनुमान है। डीएमके को 10 से 16 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, BJP और उसके सहयोगी दलों को 6 से 10 सीटें मिलने का अनुमान है।

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