Monday, June 17, 2013

सरकारी कार्यक्रम का एक प्रोटोकॉल होता है

 17 साल पुराना गठबंधन तोड़कर बीजेपी और विरोधियों के हमलों को झेल रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को अपनी सफाई दी। विश्वासघात करने के बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वासघात हमने नहीं बीजेपी ने अपने बुजुर्ग नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से किया है। नीतीश ने एक बार फिर दोहराया कि बिहार में गठबंधन ठीक से चल रहा था, जैसे ही 'बाहरी' हस्तक्षेप शुरू हुआ, गठबंधन में समस्या पैदा हो गई। साथ ही उन्होंने दंगों के बाद गुजरात में एक कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के मुद्दे पर कहा कि वह सरकारी कार्यक्रम था। सरकारी कार्यक्रमों में राजनीतिक भाषण नहीं दिया जाता है।

पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीतीश ने बीजेपी के हर आरोपों को नकार दिया। दिसंबर 2003 को कच्छ में एक रेल प्रॉजेक्ट के उद्घाटन के दौरान मोदी की तारीफ करने पर भी उन्होंने खुलकर बोला। नीतीश ने कहा, 'मैं एक सरकारी कार्यक्रम में गया था। सरकारी कार्यक्रम का एक प्रोटोकॉल होता है। उस मंच से राजनीतिक भाषण नहीं दिया जाता है, एक दूसरे की शिकायत नहीं की जाती है। मैंने उसी के तहत अपनी बात कही।'

गौरतलब है कि उस कार्यक्रम में नीतीश ने मोदी के राष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज पर छा जाने की भविष्यवाणी भी की थी। साथ ही लोगों को गुजरात दंगों को भूलकर मोदी के द्वारा किए जा रहे विकास के कामों को देखने की सलाह दी थी। बीजेपी के समर्थक सोशल साइट्स पर इस कार्यक्रम का विडियो शेयर करके नीतीश को घेरने में जुटे हैं।

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