Monday, June 30, 2014

केजरीवाल कौशांबी लौट रहे हैं

सरकारी मकान और उसके बाद किराए के मकान को लेकर उठे विवाद को देखते हुए दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने फिर गाजियाबाद के कौशांबी स्थित फ्लैट में जाने का मन बना लिया है। वह सिविल लाइंस स्थित जिस बंगले में किराए पर जाने वाले थे, उसके मालिक नरेन भीखूराम जैन ने अरविंद को फोन पर सूचित कर दिया है कि बंगले का विवाद कोर्ट में पहुंच गया है, इसलिए किसी परेशानी से बचने के लिए अभी वह किराएदार बनकर न आएं। संभावना है कि कुछ दिन में केजरीवाल अपने पुराने फ्लैट में शिफ्ट हो जाएंगे।
केजरीवाल अभी तिलक लेन स्थित सरकारी आवास में रह रहे हैं। यह मकान शासन ने उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद अलॉट किया था। उनके सीएम पद से हटने के बाद पीडब्ल्यूडी ने उन्हें मकान खाली करने का नोटिस जारी कर रखा है। अभी कुछ दिनों पहले पुरानी दिल्ली के कारोबारी नरेन भीखूराम जैन का मकान उन्होंने किराए पर लिया था। इसके बाद नरेन के बड़े भाई वीरेंद्र जैन यह कहकर कोर्ट में चले गए कि इस बंगले को लेकर परिवार में विवाद चल रहा है, इसलिए उसे किराए पर नहीं दिया जा सकता। मामला फिलहाल हाई कोर्ट में है।
इस मसले पर नरेन का दावा है कि यह बंगला उनका निजी है और उसको लेकर कोई विवाद नहीं है। मामला कोर्ट में जा चुका है, इसलिए उन्होंने केजरीवाल को फोन कर कह दिया है कि किसी भी विवाद से बचने के लिए अभी वह इस बंगले में रहने के लिए न आएं। नरेन के अनुसार, वैसे वह इस बंगले में केजरीवाल को 'मेहमान' के रूप में ठहराना चाहते थे, लेकिन विवाद से बचने के लिए अभी इसे टाल दिया गया है।
दूसरी ओर मकान की किचकिच से बचने के लिए केजरीवाल फिर से कौशांबी स्थित अपने पुराने फ्लैट में रहने के लिए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता नागेंद्र शर्मा के अनुसार, पार्टी किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहती, इसलिए उन्होंने वापस अपने पुराने फ्लैट में जाने का निर्णय ले लिया है। नागेंद्र के अनुसार, उन्हें इस बात की सूचना मिली है कि एनडीएमसी अपने इलाके के निर्वाचित सदस्यों को मकान, कार और ऑफिस की सुविधा देने का मन बना रही है, लेकिन इसमें अभी वक्त लग सकता है, इसलिए केजरीवाल फिलहाल कौशांबी लौट रहे हैं।

भारत में जल्द ही सिर्फ तीन राष्ट्रीय पार्टियां

भारत में जल्द ही सिर्फ तीन राष्ट्रीय पार्टियां बच सकती हैं। शरद पावर की अगुआई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) को राष्ट्रीय पार्टी के तमगे से वंचित किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने इस मामले में तीनों पार्टियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि लोकसभा चुनावों में हुई हार के बाद क्यों न नैशनल पार्टी का उनका स्टेटस छीन लिया जाए।
चुनाव आयोग की तय शर्तों के मुताबिक, राष्ट्रीय पार्टी के स्टेटस के लिए किसी पार्टी को चार राज्यों में कम से कम 6 फीसदी वोट या तीन-चौथाई लोकसभा सीटों पर कम से कम 2 फीसदी वोट मिलने चाहिए। या फिर कम से कम चार राज्यों में राज्य की पार्टी के तौर पर उसकी मान्यता होनी चाहिए। एनसीपी, बीएसपी और सीपीआई अब इन शर्तों को पूरा नहीं कर रही हैं।

Thursday, June 26, 2014

अच्छे दिन 2019 में आएंगे

केंद्र सरकार के चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि लोग परेशान हैं कि मोदी ने जिन अच्छे दिनों का वादा किया था, क्या वो 2019 में आएंगे, जब अगले लोकसभा चुनाव होने जा रहे होंगे।
रेल किराये, माल ढुलाई में बढ़ोतरी के बाद से ही नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर लगातार निशाना साधा जा रहा है। सरकार के चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद देश में चीनी की कीमत में 60 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है।
कांग्रेस की प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा, 'लोकसभा चुनावों से पहले यह नारा दिया गया था कि बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार। लेकिन अच्छे दिनों की शुरुआत डीजल की कीमत में 50 पैसे की बढ़ोतरी से हुई। इसके बाद फलों और सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हुई।'
कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, 'पीएम ने कहा कि कुछ कड़वी गोलियां खानी पड़ेंगी। इसके बाद रेल किराया और माल ढुलाई में बढ़ोतरी हुई। अब चीनी की कीमत बढ़ा दी गई है। लोग अब पूछ रहे हैं कि क्या अच्छे दिन 2019 में आएंगे।'
शोभा ओझा ने कहा कि लोगों ने बीजेपी को 282 सीटें दी हैं, जो कि बहुमत से 10 अधिक हैं। ऐसा इसलिए ताकि बीजेपी ने देश के लोगों से जिन अच्छे दिनों का वादा किया था, उन्हें पूरा करने में किसी तरह की कोई परेशानी न आए।

गैस का दाम डबल करना पॉपुलिस्ट और वोट हासिल करने वाला कदम नहीं

रेल किराए में बढ़ोतरी के झटके बाद मोदी सरकार फिलहाल तीन महीने तक गैस कीमतें बढ़ाने का कड़वा डोज नहीं देगी। रिलायंस को झटका देते हुए कैबिनेट ने गैस के दाम बढ़ाने का फैसला 3 महीने के लिए टाल दिया है। वह इस मामले को अच्छी तरह समझना चाहती है और उसके बाद आम लोगों के हित को ध्यान में रखकर कोई फैसला करना चाहती है। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी जैसी तेल और गैस कंपनियों के लिए झटका है। इससे उन एक्सपर्ट्स की उम्मीदें भी टूटी हैं, जो मोदी सरकार से जल्द बिजनेस-फ्रेंडली फैसले की उम्मीद कर रहे थे।
3 महीने में दूसरी बार सरकार ने गैस प्राइस बढ़ाने का मामला टाला है, जो रिलायंस और ओएनजीसी के कई अरब डॉलर के इनवेस्टमेंट के लिहाज से काफी अहमियत रखता है। यूपीए सरकार की कैबिनेट ने रंगराजन फॉर्म्युले के हिसाब से गैस की कीमत तय करने को मंजूरी दी थी। इससे गैस का दाम 1 अप्रैल से 8.4 डॉलर प्रति यूनिट हो जाता। हालांकि, चुनाव आयोग ने आचार संहिता की वजह से इसे रोक दिया था, जिसकी इंडस्ट्री ने आलोचना की थी। इंडस्ट्री का कहना था कि गैस का दाम डबल करना पॉपुलिस्ट और वोट हासिल करने वाला कदम नहीं है।
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को बताया कि आर्थिक और उपभोक्ता मामलों की कैबिनेट कमिटी ने गैस की कीमत में बढ़ोतरी को टालने का फैसला किया है। सितंबर तक गैस 4.2 डॉलर के भाव पर मिलती रहेगी। इस प्राइस को 5 साल के लिए मंजूरी दी गई थी, जिसकी मियाद इस साल 31 मार्च को खत्म हो गई। प्रधान ने कहा कि रंगराजन फॉर्म्युले सहित पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। जानकारों का कहना है कि इस फैसले से सरकारी खजाने पर दबाव भी नहीं बढ़ेगा और महंगाई बढ़ने की आशंका भी कम होगी। इससे बिजली और फर्टिलाइजर कंपनियों को भी राहत मिलेगी। हालांकि इससे ऑयल और गैस फील्ड्स में इनवेस्टमेंट पर नेगेटिव असर हो सकता है। कंपनियों का कहना है कि वे गैस की मौजूदा कीमत पर ये इनवेस्टमेंट नहीं कर सकतीं।
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सरकार के इस फैसले पर ट्वीट कर कहा कि सरकार को नैचरल गैस की कीमतें बढ़ाने के निर्णय को महज तीन महीने टालने की जगह इसे पूरी तरह खारिज कर देना चाहिए।
सत्ताधारी बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि सत्ता में आने पर वह गैस के दाम के मुद्दे का समाधान निकालेगी। इस फॉर्म्युले का कई तरफ से विरोध हुआ है, क्योंकि इससे बिजली महंगी हो जाएगी और यूरिया का खर्च, सीएनजी की दर और पाइप से आपूर्ति होने वाली रसोई गैस के दाम बढ़ जाएंगे। लेकिन उद्योग जगत के संगठन सीआईआई ने सरकार को गैस के दाम पर लिए गए फैसले को लागू करने की मांग करते हुए कहा है कि इससे पीछे हटने पर तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश पर बुरा असर पड़ेगा।

Monday, June 23, 2014

शिरडी के साईं बाबा को भगवान मानने से इनकार

शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती ने शिरडी के साईं बाबा को भगवान मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि साईं की पूजा करना हिन्दू धर्म को बांटने की साजिश है और जो शिरडी के साईं बाबा की पूजा को बढ़ावा दे रहे हैं वे चाहते हैं कि हिन्दू धर्म कमजोर हो। शंकराचार्य ने कहा कि ऐसे लोग भारत को हिन्दू प्रधान नहीं देखना चाहते हैं। स्वरूपानंद ने कहा कि साईं बाबा के नाम पर कमाई की जा रही है और हिन्दू धर्म को बांटने के लिए विदेशी ताकतें भी हावी हैं।
उन्होंने कहा, 'हिन्दू धर्म में अवतार और गुरु की पूजा होती है। हिन्दू धर्म में जो 24 अवतार हुए उनमें कलियुग में केवल बुद्ध और कल्कि का अवतार हुआ। ऐसे में साईं की पूजा का कोई मतलब नहीं है। साईं न तो अवतार हैं और न ही गुरु के रूप में हम आंक सकते हैं। गुरु आदर्शवादी होता है। लेकिन साईं में ऐसा क्या था? हम मांसाहारी को गुरु नहीं मान सकते। साईं का मंदिर बनाना कहीं से भी सही नहीं है। मंदिर के नाम पर केवल कमाई की जा रही है।' स्वरूपानंद ने कहा कि ब्रिटेन हिन्दुओं को बांटना चाहता है।
उन्होंने कहा कि साईं को हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन साईं की पूजा मुस्लिम कहां करते हैं? यदि मुसलमान भी पूजा करते तब हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात समझ में आती। स्‍वामी स्‍वरूपानंद ने लोकसभा चुनाव के दौरान 'हर हर मोदी, घर घर मोदी' के नारे पर भी आपत्ति जताई थी। इसके बाद बढ़ते बवाल को देख मोदी ने लोगों से हर हर मोदी का नारा नहीं लगाने की अपील की थी।

देर तक ऑफिस में रुकना पड़ता है

नरेंद्र मोदी सरकार में सरकारी बाबुओं की जिंदगी थोड़ी मुश्किल हो गई है। उन्हें वक्त पर ऑफिस आना पड़ रहा है। जरूरत पड़ने पर देर तक ऑफिस में रुकना पड़ता है और यहां तक कि कभी-कभी छुट्टियों की भी कुर्बानी देने का मौका आ जा सकता है। दिल्ली जिम खाना में लंच और दिल्ली गोल्फ कोर्स की हरी घास पर चहलकदमी जैसे जिंदगी के मजे भी खत्म हो चुके हैं।
रक्षा मंत्रालय के दिल्ली ऑफिस में पिछले हफ्ते कर्मचारियों को एक नोटिस पर साइन करने को कहा गया, जिसमें सुबह 9 बजे तक दफ्तर आने या अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात थी। नतीजन, नियमित तौर पर देर से आने वाले कर्मचारी अब घर से आधा घंटा पहले ही चलने लगे हैं।
नौकरशाहों को केंद्रीय सचिवालय सरकारी ऑफिस कॉम्प्लेक्स ले जाने वाले बस के ड्राइवर राकेश तोमर को बस की टाइमिंग और पहले करने को कहा गया है। तोमर ने बताया, 'पहले मैं बस स्टॉप पर इंतजार करता था। अब वे लोग मेरा इंतजार कर रहे होते हैं।' इस कॉम्प्लेक्स के बाहर 9 बजे आपको कई कर्मचारी वक्त से रेस करते हुए नजर आ जाएंगे। देरी का मतलब बॉस की डांट है।
हाउसिंग मिनिस्ट्री में अगर कर्मचारी 15 से मिनट से ज्यादा लेट होते हैं, तो उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारी को इसकी सूचना देनी पड़ती है। अटेंडेंस पर बायोमीट्रिक स्कैनर्स नजर रखते हैं और नियमित तौर पर लेट से आने वालों को 6 महीने के बाद नोटिस मिलेगा।
कई टॉप नौकरशाहों का अब इंडिया हैबिटाट सेंटर, इंडिया इंटरनैशनल सेंटर, दिल्ली गोल्फ क्लब और दिल्ली जिमखाना जैसी जगहों पर नियमित तौर पर आना-जाना बंद हो चुका है। ऐसा लगता है कि इस बात को लेकर अलिखित फरमान जारी हुआ है कि नौकरशाह गोल्फ खेलते हुए न दिखें। दिल्ली गोल्फ क्लब में तकरीबन 200 नौकरशाह मेंबर हैं। कामकाजी दिनों में कई अफसर यहां दोपहर में भी गोल्फ खेलते हुए पाए जाते थे। माना जा रहा है कि नियमित तौर पर गोल्फ खेलने वाले अफसरों को इस नियम का पालन करने को कहा गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल में ऑफिस मीटिंग के दौरान उस वक्त एक नौकरशाह की जमकर खिंचाई कर दी, जब इस शख्स को बातचीत के दौरान अपना सेल फोन ढूंढते हुए पाया। कई सीनियर ऑफिसर काफी लंबे समय तक काम कर रहे हैं। विशेष तौर पर पीएमओ में। ये लोग सुबह 8 बजे दफ्तर आते हैं और देर तक रुकते हैं। पीएमओ के एक अधिकारी ने बताया, 'खुद के लिए बिल्कुल भी वक्त नहीं मिल रहा है, फिर भी काम बचे हुए हैं।' एक और अधिकारी का कहना था कि ऑफिस की उनकी व्यस्तता के कारण उनकी पत्नी को पानी संकट की दिक्कत से खुद ही निपटना पड़ रहा है।

Friday, June 20, 2014

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन और गोवा के राज्यपाल बी वी वांचू से पूछताछ

सीबीआई डायरेक्टर रणजीत सिन्हा ने पहली बार माना है कि ऑगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की खरीद से जुड़े घोटाले में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन और गोवा के राज्यपाल बी वी वांचू से पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसी अगले कुछ दिनों में इन दोनों से पूछताछ कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो बीजेपी सरकार को इन राज्यपालों का इस्तीफा लेने का बेहतर मौका मिल सकता है।
सिन्हा ने बताया कि जांच एजेंसी पहले ही दोनों राज्यपालों के लिए सवाल तैयार कर चुकी है और जल्द ही अधिकारियों की एक टीम को पूछताछ के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने बताया, 'ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले में जांच को और नहीं रोका जा सकता है। पूछताछ इस महीने के आखिर तक होगी। हम राज्यपालों से पूछताछ गवाह के तौर पर कर रहे हैं और हमें इसके लिए सरकार से मंजूरी लेने की कोई जरूरत नहीं है।'
यह पूछे जाने पर क्या सीबीआई की योजना दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की गवर्नर शीला दीक्षित से भी पूछताछ करने की है, सिन्हा का कहना था कि ऐसी कोई योजना नहीं है। शीला दीक्षित का नाम दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) घोटाले में आया है, जिसकी जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। उन्होंने बताया, 'हमारे पास अब तक तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई सामग्री नहीं है। जांच अब भी जारी है।'
मुख्यमंत्री होने के नाते शीला दीक्षित दिल्ली जल बोर्ड की चेयरपर्सन भी थीं। सीबीआई ने दिल्ली जल बोर्ड में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप प्रॉजेक्ट के सिलसिले में पिछले साल 3 शुरुआती जांच शुरू की थी। इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड ने दिल्ली में बेरोकटोक पानी की सप्लाई के लिए यूरोपीय फर्म से समझौता किया था।
नारायणन, वांचू और दीक्षित को कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-2 सरकार में गवर्नर बनाया गया था। बीजेपी की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार 7 राज्यपालों को हटाना चाहती है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और कुछ ने जल्द ही ऐसा करने के संकेत दिए हैं।
होम मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अगर सीबीआई इस घोटाले में नारायणन और वांचू से पूछताछ करती है, तो दोनों के लिए संवैधानिक स्थिति को सही ठहरना मुश्किल हो जाएगा। एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'इस हाई ऑफिस की गरिमा को कायम रखने के लिए इन लोगों को पूछताछ होने से पहले ही खुद से इस्तीफा दे दिया जाना चाहिए।'
यूपीए-1 सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके नारायणन ने इस्तीफा देने के संकेत दिए हैं, जबकि एसपीजी के पूर्व हेड वांचू इस मामले पर चुप हैं। हालांकि, सीबीआई अधिकारियों ने साफ किया है कि पूछताछ की टाइमिंग का सरकार और राज्यपालों के बीच चल रहे टकराव से कोई लेना-देना नहीं है।