Monday, February 28, 2011

बजट में कई सुविधाओं की घोषणा

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इनकम टैक्स देने वालों के लिए बजट में कई सुविधाओं की घोषणा की है। अब ऐसे वेतनभोगी जिनको किसी अन्य स्रोत से आमदनी नहीं है, उन्हें इंडिविजुअल टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नहीं होगी। उनका रिटर्न कंपनी ही भरेगी। वहीं, वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स छूट की सीमा 1,60,000 रुपये से बढ़ाकर 1,80,000 रुपये कर दी। महिलाओं के लिए इस सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं सीनियर सिटिजन के लिए टैक्स छूट की सीमा 2,40,000 से बढ़ाकर 2,50,000 रुपये कर दिया गया। साथ ही अब 60 साल से ऊपर के लोग सीनियर सिटिजन के दायरे में आएंगे। इसके साथ ही 80 साल से ऊपर के सीनियर सिटिजन के लिए एक नया टैक्स स्लैब बनाया गया है।

Friday, February 25, 2011

जवाब देते वक्त केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी आपा खो बैठे।

लोकसभा में शुक्रवार को काले धन पर पूछे गए सवाल का जवाब देते वक्त केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी आपा खो बैठे। उन्होंने गुस्से में विपक्षी दलों के सदस्यों से कहा कि वे उन्हें अपनी बात पूरी करने दें। मुखर्जी की टिप्पणी के बाद सदन में शोर मच गया। भारी शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बर्ताव के लिए माफी भी मांगी। काले धन पर पूछे गए सवाल का जवाब देते वक्त विपक्ष की टोका टाकी से झुंझलाए मुखर्जी ने कहा, 'मुझे अपनी बात रखने दें। इसमें अवरोध पैदा न करें।' वित्त मंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी सांसदों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया और नारे लगाते हुए अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए। इसके बाद अध्यक्ष ने कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। लगभग 5 मिनट बाद लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू कर दी गई, जिसके बाद वित्त मंत्री ने अपने बर्ताव के लिए माफी मांगी। लेकिन, उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सदस्यों ने उन्हें तेज बोलने के लिए उकसाया। उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने सदन को बताया कि हसन अली, जिसके खिलाफ विदेशी बैंकों में बड़ी मात्रा में काला धन रखने का आरोप है, को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार देश छोड़कर जाने की इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।

Tuesday, February 22, 2011

फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बरी होने ने उसकी जांच पर फिर नए सिरे से सवाल

26/11 मामले में अजमल कसाब को बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सोमवार को फांसी की सजा की पुष्टि से भले ही मुंबई क्राइम ब्रांच अपनी पीठ थपथपाए , लेकिन इस केस में फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बरी होने ने उसकी जांच पर फिर नए सिरे से सवाल उठा दिए हैं। फहीम और सबाउद्दीन को निचली अदालत ने भी बरी कर दिया था। दो - दो अदालतों के एक जैसे फैसले के बाद अब यह एकदम साफ हो गया है कि 26/11 को मुंबई में जिन जगहों पर दस आतंकवादियों ने फिदायीन हमला किया था , उन जगहों की रेकी फहीम या सबाउद्दीन ने नहीं , बल्कि डेविड हेडली ने लश्कर के कई आकाओं और तहव्वुर राना के कहने पर की थी। 26/11 से पांच दिन पहले तक राना मुंबई में ही था। लेकिन जब 26/11 का मुकदमा शुरू हुआ , तो हेडली और राना की साजिश का किसी को सुराग ही नहीं था। इसलिए मुकदमे के शुरुआती दौर में मुंबई क्राइम ब्रांच की कहानी को सच माना जाता रहा। अक्टूबर 2009 में हेडली और राना जब अमेरिका में गिरफ्तार हुए , उसी के बाद से तमाम लोगों का शक बढ़ गया कि फहीम और सबाउद्दीन को इस केस में गलत फंसाया गया है। इसकी मूल वजह यह थी कि दोनों ही आरोपी 26/11 के दिन ही नहीं , उससे सात महीने पहले से यूपी की जेल में बंद थे। मुकदमे के दौरान अपनी बात साबित करने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच नुरुद्दीन नामक गवाह की गवाही पर निर्भर रही , जिसने दावा किया कि फहीम ने जब नेपाल में सबाउद्दीन को नक्शा सौंपा , उस समय वह वहां मौजूद था। मुंबई क्राइम ब्रांच का दावा था कि ये नक्शे फहीम ने उस वक्त मुंबई की रेकी के दौरान बनाए थे , जब वह यूपी की जेल में बंद नहीं था। पर फैसले के दौरान अदालत ने कहा था कि पुलिस ने इस बात के कोई सबूत नहीं दिए कि नुरुद्दीन नेपाल गया था। मुंबई क्राइम ब्रांच ने फहीम द्वारा बनाया नक्शा पेश करते हुए कहा था कि यह नक्शा गिरगांव एनकाउंटर में मारे गए अबू इस्माइल की जेब से मिला था। लेकिन 26/11 का फैसला सुनाते वक्त जज तहिलियानी ने कहा था कि एनकाउंटर के बाद इस्माइल खून से लथपथ हो गया था। उसके कपड़े भी सन गए थे। लेकिन क्राइम ब्रांच ने जो नक्शा सबूत के तौर पर पेश किया , उसमें न तो कोई खून का निशान था और न ही वह कटा - फटा था। जिरह के दौरान बचाव पक्ष द्वारा यही मुद्दा हाई कोर्ट में भी उठाया गया।

Wednesday, February 16, 2011

मैं मजबूर हूं।

भ्रष्टाचार और घोटालों पर विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के न्यूज़ चैनलों के संपादकों से मुलाकात में जो सफाई दी उसका लब्बोलुआब यही था कि मैं मजबूर हूं। स्पेक्ट्रम घोटालों से लेकर भ्रष्टाचार की नैतिक जिम्मादारी तक सारे सवालों के जवाब में उनका कहना था कि गठबंधन धर्म के चलते मेरे हाथ बंधे हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जेपीसी समेत किसी भी जांच समिति में पेशी से डरता नहीं हूं। एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, ' 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन से पहले मैंने 2 नवंबर 2007 को मैंने तत्कालीन टेलिकॉम मिनिस्टर ए. राजा की चिट्ठी लिखी थी। उस चिट्ठी में अपनी और कई लोगों की चिंताएं जताई थीं।' प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उन्हें राजा की 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए पहले आओ, पहले पाओ की विवादास्पद नीति के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों बारे में जानकारी नहीं थी। इस बारे में मेरे साथ कभी चर्चा नहीं हुई और न ही इसे मंत्रिमंडल के सामने लाया गया। यह पूरी तरह दूरसंचार मंत्री का फैसला था। उन्होंने कहा, 'वित्त और दूरसंचार मंत्री 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की मौजूदा नीति को जारी रखने पर सहमत थे, ऐसे में मुझे नहीं लगा कि मैं नीलामी पर जोर देने की स्थिति में हूं।' शिकायतों के बावजूद राजा को 2009 में दोबारा मंत्री क्यों बनाया ? इस सवाल के जवाब में उन्होंने गठबंधन की राजनीति का रोना रोते हुए कहा कि कि राजा को मंत्री बनाने के पीछे क्या बात हुई मुझे नहीं मालूम। प्रधानमंत्री ने कहा कि गठबंधन सरकार में चीजें वैसी नहीं होती जैसा आप चाहते हैं, गठबंधन धर्म का भी पालन करना पड़ता है।

Monday, February 14, 2011

प्यार का एहसास , मन बेचैन

सर्दियां बीतने को हैं , गर्मी ने दस्तक दे दी है। बसंत ऋतु के दौरान प्यार के इजहार से बेहतर और कौन सा मौका हो सकता है। हमें जैसे ही प्यार का एहसास होता है , मन बेचैन हो जाता है। धड़कनें बढ़ जाती हैं। वसंतोत्सव के उल्लासित माहौल में जैसे - जैसे वक्त बीतता है , वैसे - वैसे अपने वैलंटाइन से इजहार करने का जज्बा जोर मारने लगता है। जल्द ही ' उसके ' बिना कुछ अच्छा नहीं लगता। इस अनकही बात को कहने के रास्ते तलाशे जाते हैं , पर डर इस बात का लगता है कि कहीं यह ' अनकही बात ' अनसुनी न रह जाए। इस भावना के इजहार के लिए सबसे अच्छा दिन यानि वैलंटाइंस डे का इंतजार किया जाता है। अक्सर यह समस्या आती है कि प्रेम का इजहार कैसे करें ! प्रेम - पत्र से ? नहीं - नहीं , वह अब पुराना हो चला है। इसमें भी कुछ अलग होना चाहिए , सबसे जुदा। साथ में , एक खास गिफ्ट रहे तो क्या बात है। आज के युग में दो व्यक्तियों के बीच पनपने वाली प्यार की इस अनुभूति का भी पूरी तरह बाजारीकरण हो चुका है। आप अपने प्यार को किस तरह से और किस माध्यम से जाहिर करेंगे यह आप नहीं बल्कि आज का मार्केट तय करता है। आज मार्केट तय करता है कि हम अपने वैलंटाइन से क्या कहें और क्या गिफ्ट दें। और यह मार्केट कोई छोटा - मोटा नहीं बल्कि सैकड़ों करोड़ों रुपये के टर्न - ओवर वाला हो गया है। हालात ये हो चुके हैं कि इस वैलंटाइंस डे का इंतजार जितना प्रेमी युगल करते हैं , उससे कहीं अधिक बाजार करता है। बाजार को सिर्फ सेलिब्रेशन का बहाना चाहिए। फिर देखिए कि कैसे उसकी मार्केटिंग शुरू होती है। इस समय पूरा बाजार दिल के आकार वाली सैकड़ों भेंट वस्तुओं से अटा पड़ा है। नवी मुंबई , ठाणे और मुंबई भर के सैकड़ों शॉपिंग मॉल्स , गिफ्ट आर्टिकल्स की दुकानों और फूल बाजारों में सिर्फ और सिर्फ वैलंटाइंस डे से जुड़ी वस्तुओं का ही नजारा दिख रहा है। इनमें चॉकलेट्स के डिब्बे व बुके , टेडी बियर , हार्टशेप्ड कैंडल्स , हार्टशेप्ड गुब्बारे , पेन , ब्रेसलेट्स , सॉफ्ट ट्वायज , लव मैसेज , बेल्ट्स , परफ्यूम्स , फोटो फ्रेम्स , कई भाषाओं में लिखे ग्रीटिंग कॉर्ड्स जिनमें जनरल कार्डस् , आदि शामिल हैं। ये सभी 20-30 रुपये से 600-700 रुपये तक की रेंज में बिक रहे हैं। प्यार भले ही हर किसी का निजी मामला हो , पर इसका फायदा उठाने में पूरा बाजार लगा हुआ है। आज यह हम कह सकते हैं कि अग्रेसिव मार्केटिंग के चलते ही हर इंसान हर मौके को औसत से अधिक सेलिब्रेट कर रहा है। प्रेम से चूंकि युवा वर्ग का स्वाभाविक रूप से सर्वाधिक संबंध रहता है इसलिए युवा वर्ग द्वारा पहने जाने और उपयोग में लाई जाने वाली हर वस्तुओं की निर्माता कंपनियों में पूरे युवा वर्ग को टार्गेट करके मार्केटिंग की जाती है। होटलों , शॉपिंग मॉल्स , रेस्तरां , कॉफी शॉप्स , रिसोर्ट्स , पिकनिक स्पॉट्स , हिल स्टेशनस् , हॉली - डे होम्स , पब्स आदि शामिल हैं। इसके लिए प्रेमी जोड़ों को भारी डिस्काउंट का लालच दिया जा रहा है। बाजारों में गिफ्ट की चाहे कितनी भी किस्में आ जाएं , वैलंटाइंस डे के लिए रेड - रोज यानी लाल गुलाब का स्थान कोई भी नहीं ले सकता है। पूरे मुंबई महानगर परिसर में वैलंटाइंस डे के लिए लाल गुलाबों की खेप पहले ही पहुंच चुकी है। वैसे भी इस समय गुलाब के फूलों का उत्पादन औसत से काफी कम हुआ है। इसके चलते सभी गुलाबों विशेष कर लाल गुलाब काफी महंगे हो गए हैं। वैसे इस समय करीब 35 रंगों के गुलाबों का उत्पादन किया जाता है। मुंबई क्षेत्र के बाजारों में राज्य के नाशिक , पुणे , सातारा , कोल्हापुर आदि जिलों के अलावा पूरे देश और विदेशों से भी गुलाब बिकने के लिए आता है। प्रेमियों में कुछ नया करने का जुनून हमेशा ही रहता है। अब इसमें अपने शरीर पर टैटू यानी गोदने गुदवाने का नया फैशन शामिल हो गया है। इसके चलते शहर के सभी टैटू पार्लरों में युवा वर्ग की भीड़ काफी देखी जा रही है। इसमें कपल्स की भी काफी संख्या है। युवा वर्ग में युवतियों का टैटू गोदवाने के लिए अधिक जोर है। इसके लिए हार्ट्स , विंग्स , विभिन्न फ्लावर्स , बटर - फ्लाई , एंजल्स , एंकर्स आदि समेत अपने पार्टनरस् के नाम या उनके संक्षिप्त नामों को लिखने का फैशन जोर में है। बता दें कि टैटू दो प्रकार के होते हैं। अब जब सरकार ने समलैंगिकों के लिए कानूनी कवच का बीड़ा उठा लिया है , तो इस समूह के लोगों में भी खुलेआम अपने प्रेम - प्रदर्शन का जोर बढ़ता जा रहा है। कई होटलों में लंच और डिनर के लिए समलैंगिक संबंध रखने वाले कई पुरुष युगलों और महिला युगलों द्वारा अपने लिए टेबल बुक करके रखने की खबर मिली हैं। प्रेमी युगलों द्वारा खुलेआम प्रदर्शन करने को रोकने के लिए खाकी वर्दी वाली पुलिस के अलावा मॉरल पुलिस यानी कुछ राजनैतिक दलों के स्वयंसेवक भी अश्लील प्रदर्शन पर उतारू प्रेमी जोड़ों पर कड़ी नजर रखेंगे। ये लोग अमूमन हर उस जगह तैनात होंगे जहां प्रेमी युगलों के मिलने के अड्डे होते हैं। शिवसेना ने तो इस दिन के लिए विशेष रूप से देह - दान या अंग - दान शिविर का आयोजन करने की तैयारी कर रखी है। इसके लिए विशष रूप से छापे गए फॉर्म में इच्छुक नागरिक अपनी मृत्यु के बाद अपनी आंखों , किडनी , लीवर , त्वचा या पूरे देह - दान का संकल्प ले सकते हैं। एनसीपी ने तो ' इंडिया इज माई वैलंटाइन ' मनाने की घोषणा कर रखी है। कुछ अन्य सामाजिक संगठनों ने इस दिन को ' संस्कृति रक्षा दिवस ' के रूप में तो कुछ ने ' दादा - दादी या नाना - नानी दिवस ' के रूप में मनाने की तैयारी कर रखी है।

चुन्नी अपनी बहन की ही तरह बदनाम होना चाहती है।

मुन्नी को तो आप जानते ही होंगे जो सलमान की खातिर बदनाम हो गई। उसी मुन्नी की एक बहन है चुन्नी जो अपनी बहन की ही तरह बदनाम होना चाहती है। लेकिन किसी एक के लिए नहीं , बल्कि कइयों के लिए। दरअसल चुन्नी को आजकल कई सारे लोगों से प्यार हो गया है। वह कभी किसी के बारे में सोचती है तो कभी किसी के बारे में ... अब फितूर चढ़ा है आज वैलंटाइंस डे पर तो वह अपने दिल की बात उन तक पहुंचा ही देगी। लेकिन वह कन्फ्यूज्ड है ... कि इनमें से चुने किसको। अब वह यही सोच रही है कि अगर वह मेरे वैलंटाइन होते तो मैं उनसे क्या कहती , उन्हें क्या गिफ्ट देती , उनसे क्या गिफ्ट लेती। आइए जानें कि क्या सोचती है हमारी चुन्नी : ए . राजा - ए G ओ G. आप बड़े 2 much हो G. इस वैलंटाइंस डे में आप भी कहां जाकर बैठ गए। अब आपसे कैसे मिलूं और और क्या कहूं। बस इतना ही कहती हूं ' गेट वेल सून G' राहुल गांधी - लोग कहते हैं कि आप देश का चमकता सितारा हो , ऐसा सितारा जो दूसरों को रास्ता दिखाता है। एक्चुअली मैं आपके लिए एक नजर का चश्मा लाई हूं। आप इसे पहनें। इसे पहनकर आपको आपके आसपास ही कुछ गुस्ताख लोग आपके मुल्क के साथ खिलवाड़ करते साफ नजर आएंगे। जब आप सबको रास्ता दिखाते हो तो उन्हें भी रास्ते पर ले आओ ना।

Tuesday, February 8, 2011

चोरी और सीनाजोरी

सीवीसी प्रमुख पद पर नियुक्ति मामले की सुनवाई के दौरान पी. जे. थॉमस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि उनकी नियुक्ति को जूडिशियल रिव्यू के दायरे में नहीं लाया जा सकता। साथ ही दलील दी गई कि उनके खिलाफ करप्शन केस में चार्जशीट पेंडिंग होने से उनकी नियुक्ति को चुनौती नहीं दी जा सकती। थॉमस के वकील के. के. बेनुगोपाल ने कहा कि मतदाता कानून के तहत भी दोषी सांसद और एमएलए अपने पद पर बने रह सकते हैं भले ही आपराधिक मामलों में उनके दोषी साबित किए जाने के खिलाफ अपीलें पेंडिंग हों। हालांकि चीफ जस्टिस एस. एच. कपाडि़या की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, दोष साबित होने का कोई तथ्य है और यदि कोई व्यक्ति नियुक्त किया जाता है तो क्या हम कह सकते हैं कि नियुक्ति की कोई न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। वेणुगोपाल ने कहा कि चूंकि कानून सीवीसी के तौर पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति की योग्यता और औचित्य को योग्य अथवा अयोग्य करार देता है इसलिए जब इसका सेलेक्शन होता है तब संबंधित अथॉरिटी के संतुष्टि के आधार पर इसका चयन होता है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या नियुक्ति प्राधिकार समिति में शामिल सदस्यों के बीच अजेंडा के साथ पूरी फाइल रखी गई थी तब अटॉर्नी जनरल ने कहा कि थॉमस के मामले की पूरी फाइल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमिटी के सदस्यों के सामने नहीं रखी गई थी, जिसने नियुक्ति का फैसला किया था। हालांकि वाहनवती ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें नहीं पता कि क्या हुआ, समिति ने क्या कहा, उन्होंने क्या किया और सदस्यों के बीच क्या रखा गया। हालांकि इस बात से इनकार कर दिया कि थॉमस की नियुक्ति में किसी तरह की प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था।
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