Sunday, August 23, 2009

गड़े मुर्दे उखाड़ने में लग गए जसवंत सिंह

पार्टी से निकाले जाने के बाद जसवंत सिंह नए-नए बयानों से बीजेपी के गड़े मुर्दे उखाड़ने में लग गए हैं। कंधार विमान अपहरण मुद्दे पर लालकृष्ण आडवाणी पर झूठ बोलने का आरोप लगाने के बाद जसवंत सिंह ने कहा है कि 2002 के दंगे के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते थे लेकिन आडवाणी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था। बकौल जसवंत, आडवाणी ने वाजपेयी से कहा था कि इस कदम से पार्टी में बवाल मच जाएगा। जसवंत सिंह ने एक टीवी प्रग्राम में कहा कि दंगे के बाद वाजपेयी काफी व्यथित थे और उन्होंने अपना इस्तीफा तक लिखा लिया था। उस दौरान संसद का सेशन चल रहा था। जसवंत ने कहा, ' वाजपेयी ने एक पेपर निकाला और अपना इस्तीफा लिखने लगे। मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, तो वह मेरी ओर देखने लगे और बोले मेरा हाथ छोड़ दो।मैं उन्हें किसी तरह समझा-बुझाकर उनके घर ले गया।
उन्होंने बताया कि जब वह, वाजपेयी, आडवाणी और अरुण शौरी के साथ विमान से बीजेपी की मीटिंग में भाग लेने जा रहे थे उस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री के भविष्य को लेकर बात हुई थी। जसवंत ने कहा कि वाजपेयी ने पूछा, गुजरात का क्या करना है? इसके बाद वहां चुप्पी छा गई। वाजपेयी ने इसके बाद कहा कि हमें गुजरात के बारे में सोचना चाहिए। जसवंत ने कहा कि इस सवाल के बाद आडवाणी उठकर बाथरूम की ओर जाने लगे, तो वाजपेयी ने कहा कि पूछिए क्या करना है। बकौल जसवंत, जब उन्होंने आडवाणी के पास पहुंचकर इस मसले पर पूछा तो उन्होंने कहा कि पार्टी में बवाल खड़ा हो जाएगा। वाजपेयी द्वारा इस्तीफा दिए जाने का मन बनाने की घटना को याद करते हुए जसवंत ने बताया कि उस दिन प्रमोद महाजन ने सदन से उन्हें फोन करके संसद के पीएमओ में तुरंत आने को कहा था। उनके अनुसार महाजन ने उन्हें कहा, संभालिए इस्तीफा दे रहे हैं। घटना का ब्योरा देते हुए जसवंत ने बताया कि वाजपेयी ने अपने सचिव को बुलाया। मैंने उनके सचिव से वापस जाने और अभी नहीं आने को कहा। इस पर वाजपेयी मुझसे सख्ती से बोले- क्या कर रहे हो। यह पूछे जाने पर कि क्या वाजपेयी मोदी को बर्खास्त करना चाहते थे, सिंह ने कहा कि वह बर्खास्त शब्द का प्रयोग तो नहीं करेंगे, लेकिन निश्चित तौर पर वह पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया करने और कुछ सुधारात्मक कदम उठाने की इच्छा रखते थे।

Thursday, August 20, 2009

राष्ट्र ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आज उनके 65वें जन्मदिन पर याद किया।

राष्ट्र ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आज उनके 65वें जन्मदिन पर याद किया। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राजीव गांधी की पत्नी तथा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिवंगत नेता को उनके स्मारक वीर भूमि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका तथा उनके पति राबर्ट वड्रा भी इस अवसर पर मौजूद थे। राजीव गांधी के स्मारक को कमल के सैकड़ों सफेद फूलों से सजाया गया था। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, दिल्ली के उप राज्यपाल तेजिंदर खन्ना, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इमरान खान और पाकिस्तान की दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बीच 'बेहद अंतरंग संबंधों' का दावा किया

मशहूर क्रिकेटर इमरान खान की नई बायॉग्रफी ने पाकिस्तान में तहलका मचा दिया है। किताब में सनसनीखेज खुलासा करते हुए इमरान खान और पाकिस्तान की दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बीच 'बेहद अंतरंग संबंधों' का दावा किया गया है। बताया जाता है कि यह तब की बात है जब इमरान और बेनजीर ऑक्सफर्ड में पढ़ा करते थे। क्रिस्टोफर स्टैनफर्ड ने अपनी इस किताब में लिखा है कि बेनजीर भुट्टो इमरान खान से काफी प्रभावित थीं। ऑक्सफर्ड के दिनों में दोनों एक-दूसरे के 'बेहद करीब' थे। स्टैनफर्ड ने किताब में लिखा है कि दोनों के बीच सेक्शुअल रिलेशन की बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। किताब में यह भी खुलासा किया गया है कि इमरान की मां दोनों की शादी के लिए रजामंद थी और उन्होंने इसके लिए कोशिश भी की, लेकिन सफल न हो सकीं। स्टैनफर्ड ने इस किताब के लिए इमरान और उनकी पूर्व पत्नी जेमिमा से बात की। उन्होंने किताब में अपने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भुट्टो 1975 में इमरान के करीब आईं। तब वह 21 साल की थी और सेकंड यिअर में पढ़ती थीं। उन्होंने कहा कि बेनजीर क्रिकेट में डेब्यू कर रहे इमरान की शख्सियत से बेहद आकर्षित थीं। संभवत बेनजीर ने ही पहली बार इमरान को 'लॉयन ऑफ लाहौर' कहा था। खान और भुट्टो के बीच सेक्शुअल रिलेशन की बात इसलिए भी पुख्ता होती है क्योंकि इमरान के बारे में उनके एक दोस्त का कॉमेन्ट था- 'खान हर किसी के साथ सोए थे।'

Wednesday, August 19, 2009

और जसवंत आउट

और जसवंत आउट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अपनी किताब में जिन्ना को सेक्युलर बताना जसवंत सिंह को काफी महंगा पड़ा है। जसवंत सिंह पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और दार्जिलिंग से सांसद भी हैं। सूत्रों के मुताबिक, संघ परिवार और पार्टी के कई हलकों ने जसवंत सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दबाव बनाया था। इसी का नतीजा है कि जसवंत सिंह को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जसवंत से बैठक में न आने के लिए कहा था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि जसवंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता खत्म कर दी गई है। अब जसवंत सिंह पार्टी के किसी भी पद पर नहीं हैं। राजनाथ ने बताया कि यह फैसला पार्टी के संसदीय बोर्ड ने मिलकर लिया। लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की जवाबदेही तय करने की मांग करनेवाले नेताओं अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा को भी इस चिंतन बैठक से दूर रखा गया है। गौरतलब है कि बीजेपी के सीनियर लीडर लाल कृष्ण आडवाणी जब पाकिस्तान में जिन्ना की मजार पर गए, तब उन्होंने जिन्ना की काफी तारीफ की थी। इसके बाद भी पार्टी में खूब बवाल मचा था और आडवाणी को पार्टी अध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा था। अपडेट@ 11:30 AM अपनी किताब में मोहम्मद अली जिन्ना को सेक्युलर बताने के कारण विवाद में आए जसवंत सिंह इस चिंतन बैठक से दूरी बनाए हुए हैं। जसवंत ने अपने लिए शिमला में अलग होटल बुक कराया है और वह मंगलवार को आडवाणी द्वारा दिए गए रात्रिभोज में भी शामिल नहीं हुए। खबर है कि जसवंत सिंह अब तक अपने होटल से बाहर नहीं निकले हैं। गौरतलब है कि जसवंत ने अपनी किताब में देश के विभाजन के लिए जिन्ना को नहीं बल्कि नेहरू और कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार बताया है। बीजेपी के सीनियर नेता शिमला की वादियों में बुधवार से तीन दिन तक आत्मनिरीक्षण करेंगे। वे सोचेंगे कि अपने सहयोगी दलों के साथ पार्टी पिछले लोकसभा चुनावों में इतनी सीटें क्यों नहीं ला सकी कि लालकृष्ण आडवाणी देश के प्रधानमंत्री बन सके। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वसुंधरा राजे और उनके समर्थकों के बागी तेवरों और बीजेपी के सीनियर नेता जसवंत सिंह की पुस्तक में मुहम्मद अली जिन्ना और सरदार वल्लभ भाई पटेल पर की गई टिप्पणियों से उठ रहे बवंडर के माहौल में यह बैठक होगी।
पार्टी आलाकमान ने वसुंधरा राजे से इस्तीफा मांगे जाने और जसवंत सिंह की जिन्ना और पटेल पर की गई टिप्पणियों से बन रहे माहौल को संभालने की पूरी कोशिश की है। वसुंधरा के मामले में आलाकमान ने कह दिया कि त्यागपत्र के मामले में कोई समयसीमा नहीं बांधी गई है और जसवंत सिंह की किताब में जिन्ना और पटेल की टिप्पणियों पर चिंतन बैठक की पूर्व संध्या पर पार्टी ने खुद को अलग कर लिया। हालांकि पार्टी की हार के बाद सवाल खड़े करने वाले सीनियर नेताओं में से यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी को चिंतन बैठक से दूर रखने में आलाकमान सफल रहे हैं लेकिन जसवंत सिंह उन 25 नेताओं में शामिल हैं जो इस बैठक में भाग ले रहे हैं। जसवंत सिंह ने पार्टी के मुख्य चुनाव प्रबंधक अरुण जेटली को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर अप्रसन्नता प्रकट करते हुए चुनावों में बीजेपी की हार के बाद प्रदर्शन और पुरस्कार में संबंध बैठाने का सवाल खड़ा किया था। हालांकि संकेत इस प्रकार के मिल रहे हैं कि पार्टी आलाकमान चिंतन बैठक के दौरान 'बीती ताहे बिसार के, आगे की सुध ले' की तर्ज पर आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की चुनावी रणनीति को चर्चा का केंद्र बनाने की कोशिश करे। लेकिन जसवंत सिंह के रुख से लगता है कि वह पार्टी नेताओं के लिए कुछ असहज सवाल फिर से खड़े करने की कोशिश करें। बैठक में भाग लेने वाले नेताओं में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, संसद के दोनों सदनों के प्रतिपक्ष के नेता-सुषमा स्वराज और अरुण शौरी, चुनावों में खराब प्रदर्शन के कारणों का पता लगाने की जिम्मेदारी वहन करने वाले बाल आप्टे आदि शामिल हैं। दिल्ली से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विजय गोयल को ही बैठक में शामिल किया गया है। चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारणों का पता लगाने के लिए बाल आप्टे समिति का गठन किया गया था जिसने विभिन्न राज्यों की पार्टी की इकाइयों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। उस रिपोर्ट पर विचार किया जा सकता है। हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले चुनावों को ध्यान में रख कर भी आगे की रणनीति तैयार की जा सकती है। नई दिल्ली में सत्ता में आने के लिए पार्टी की चिंता देश के दक्षिणी राज्यों में मतदाता का समर्थन प्राप्त करना है। आडवाणी भी दक्षिण भारत में अपना आधार मजबूत करने पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि देश के दक्षिणी हिस्सों की 145 लोकसभा सीटों पर प्रतिनिधित्व के मामले में बीजेपी फिलहाल शून्य है। वैसे पार्टी के नेता चिंतन बैठक के शुरू होने से पहले ही शंका प्रकट कर रहे हैं कि इस बैठक से कुछ खास हासिल होने वाला नहीं है। 2004 के चुनावों की हार के बाद भी पार्टी सबक नहीं सीख सकी तो तीन दिन की बैठक में क्या हो सकता है। आम चुनावों में अभी पांच साल का समय शेष है और विधानसभा चुनावों में हार जीत के कारण राज्यवार ही हो सकते हैं। इसलिए भिन्न राज्यों में एक रणनीति काम करने वाली नहीं है।

Tuesday, August 18, 2009

भारत में रह रहे मुसलमानों की आंखों में देखिए।

बीजेपी के सीनियर नेता जसवंत सिंह ने कहा है कि भारतीय मुसलमानों के साथ दूसरे ग्रह के प्राणी जैसा बर्ताव किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश का बंटवारा जिन्ना नहीं , बल्कि नेहरू की केंद्रीयकृत राजनीति की वजह से हुआ था। एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में जसवंत ने जिन्ना से लेकर भारत - पाक विभाजन समेत कई मुद्दों पर बेबाक राय जाहिर की। उनकी नई किताब ' जिन्ना - इंडिया , पार्टिशन , इंडिपेंडंस ' आज रिलीस होने वाली है।

कवि की चुटकीः
देश विभाजन के लिए नेहरू जिम्मेदार भारतीय मुसलमानों का जिक्र करते हुए जसवंत ने कहा कि यहां के मुस्लिमों ने विभाजन की कीमत चुकाई है। उन्होंने बेबाकी से कहा , ' भारत मुसलमानों के साथ ' दूसरे ग्रह के प्राणी ' की तरह बर्ताव करता है।
भारत में रह रहे मुसलमानों की आंखों में देखिए।
आपको उनमें वतन की पहचान की अनिश्चितता का दर्द नजर आएगा। भारत में मुसलमान ज्यादा मजबूत हो सकते थे। मैं जो कुछ कह रहा हूं , वह बेशक पाकिस्तान और बांग्लादेश को अच्छा नहीं लगेगा। ' जब उनसे पूछा गया कि क्या वह जिन्ना को एक महान व्यक्ति मानते हैं तो जसवंत ने कहा , ' हां बिल्कुल मानता हूं क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं में से एक चीज बनाई थी और वह खुद को नापसंद करने वाली कांग्रेस पार्टी व अंग्रेजी शासन के खिलाफ अपने दम पर खड़े हुए। गांधी जी ने खुद भी जिन्ना को महान भारतीय कहा था , तो हम उन्हें यह दर्जा क्यों नहीं देते ? हम यह क्यों नहीं समझते कि महात्मा गांधी ने ऐसा क्यों कहा था। ' पूर्व विदेश मंत्री सिंह ने कहा , ' मैं जिन्ना की प्रचलित छवि को सही नहीं मानता। भारत ने जिन्ना को गलत समझा और उन्हें एक हिंदू विरोधी व्यक्ति माना। प्रचलित धारणा के उलट जसवंत का मानना है कि जिन्ना नहीं बल्कि नेहरू की केंद्रीयकृत राजनीति की वजह से ही देश का बंटवारा हुआ था। ' सिंह के मुताबिक , ' क्या होता अगर अलग होने के इस रास्ते और निरंतर विवाद के बजाय हमने 1947 के विभाजन के बाद मिलकर काम करने का रास्ता चुना होता। ' इंटरव्यू में जब जसवंत सिंह के किताब में छपे अंश का उदाहरण देते हुए पूछा गया कि क्या भारत को फिर विभाजन के दौर से गुजरना पड़ सकता है ? इस पर जसवंत ने कहा , ' रिजर्वेशन की समस्या 1906 में शुरू हुई थी। अब देखिए सच्चर कमिटी क्या कहती है ? मुसलमानों के लिए रिजर्वेशन की व्यवस्था करो। अब हम क्या कर रहे हैं ? फिर वही रिजर्वेशन। मेरा मानना है कि मुसलमानों के लिए रिजर्वेशन एक त्रासदी भरा कदम होगा। मुझे निजी तौर पर लगता है कि इससे हमें तीसरे विभाजन के दौर से गुजरना पड़ेगा। '

Monday, August 17, 2009

एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासियों को एससी, एसटी का लाभ नहीं मिल सकता

एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासियों को एससी, एसटी का लाभ नहीं मिल सकता
सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि एक राज्य से पलायन करके दूसरे राज्य में बसने वाले एससी, एसटी और ओबीसी के लोग आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकते। जिस राज्य में वे बस गए हैं, वहां अगर उनकी जाति या जनजाति को आरक्षित समुदाय में नहीं रखा गया है तो उन्हें यह सुविधा नहीं मिल सकती है। कोर्ट ने कहा कि प्रवासी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लोग दूसरे राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत भी आरक्षण का लाभ देने का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट के मुताबिक, जाति या कबीले से जुड़े लोग एक राज्य में हानि का सामना कर सकते हैं, लेकिन दूसरे राज्य में हो सकता है कि उसी हानि का सामना नहीं करना पड़े।

Sunday, August 16, 2009

गृह मंत्री श्री चिदम्बरम ने आम आदमी की तरह ही टिकट खरीदकर आतंकवाद से नहीं घबराने की नसीहत दी

गृह मंत्री श्री चिदम्बरम ने आम आदमी की तरह ही टिकट खरीदकर आतंकवाद से नहीं घबराने की नसीहत दी
यहां वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप देखने के लिए टिकिट खरीद रहे दर्शक अपनी लाइन में गृह मंत्री पी. चिदंबरम को खड़े देखकर चौंक गए। चिदंबरम ने अपने पैसों से काउंटर से टिकिट खरीदा और दर्शक गैलरी में बैठकर मैच का फाइनल देखा। इस तरह उन्होंने यह मेसिज देने की कोशिश की कि चैंपियनशिप को आतंकवादियों से कोई खतरा नहीं है। गौरतलब है कि इंग्लैंड की टीम यहां आतंकवादी खतरे की आशंका को वजह बताकर वापस लौट गई थी। चिदंबरम कमर्शल फ्लाइट से हैदराबाद पहुंचे और अपनी प्राइवट कार में बैठकर गोचिवाउली स्टेडियम आए। उन्होंने एक हजार रुपये का टिकिट खरीदा और आम दर्शकों के बीच बैठकर मैच का लुत्फ लेने लगे। इसी बीच आयोजकों की नजर उन पर पड़ी। आयोजकों ने उनसे आग्रह किया कि वह मैन्स चैंपियन चीन के लिन दैन को पुरस्कार दें। बाद में, उन्होंने वीआईपी गैलरी में बैठकर मिक्स्ड डबल्स और विमिंस डबल्स मैच देखे। चिदंबरम ने कहा कि मेरे द्वारा बयान जारी किए जाने के बावजूद इंग्लैंड की टीम द्वारा लश्कर के हमले का खतरा बताकर लौट जाने के बाद से ही मैं अंदर ही अंदर जल रहा था। इसीलिए मैं यहां आया।