Thursday, July 30, 2009

दो बार डेड घोषित कर दिया, वह दफनाए जाने से पहले जीवित निकला।

इसे ईश्वरीय चमत्कार कहें या डॉक्टरों की लापरवाही कि जिस नवजात शिशु को मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल ने मंगलवार को यहां दो बार डेड घोषित कर दिया, वह दफनाए जाने से पहले जीवित निकला। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों के खर्चीले इलाज के कारण उसके पैरंट्स को लौटकर उसी सरकारी अस्पताल की शरण लेनी पड़ी। नवजात के पिता मनोज शर्मा ने कहा कि यह कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि डॉक्टरों लापरवाही है। उन्होंने एक नहीं, दो बार मेरे बेटे को मृत घोषित कर सर्टिफिकेट जारी कर दिया। वहीं, सरकारी हमीदिया अस्पताल के शिशु शल्यक्रिया विभाग के सर्जन डॉ. राजन ने बस इतना बताया कि शिशु कमजोर और औसत से कम वजन का था। उसका फूड पाइप ब्लॉक था।

युवती को कथित तौर पर छेड़ने के बाद युवती ने उस पर हमला कर दिया

असम के उत्तरी कछार पर्वतीय जिले के हाफलॉन्ग में सेना के जवान द्वारा एक युवती को कथित तौर पर छेड़ने के बाद युवती ने उस पर हमला कर दिया और उसे पत्थर मारे। सेना की सिख रेजीमेंट की आठवीं बटालियन का लांस नायक गुरविंदर सिंह इस युवती रालि फैहरियन की मध्य हाफलॉन्ग स्थित कपड़ों की दुकान पर बुधवार को गया था। सूत्रों ने कहा कि वर्दी में आए सिंह ने रालि से कुछ अंडरवेयर्स दिखाने को कहा। जब वह अंडरवेयर्स दिखाने लगी तो सिंह ने कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक हरकतें कीं। उन्होंने कहा कि रालि उसे दुकान से बाहर ले आई और उस पर पत्थर फेंके। इस पर स्थानीय लोग तथा अन्य सैनिक उसे बचाने लगे। उग्रवादी संगठन दीमा हलाम दाओगा (ज्वेल) के व्यापक तौर पर हिंसा फैलाने के बाद अशांत उत्तरी कछार पर्वतीय जिले में उग्रवाद निरोधी अभियानों के लिये सेना की तैनाती की गई है।

Monday, July 27, 2009

20 लाख रुपये तक के मकानों के 10 लाख रुपये तक के होम लोन पर ब्याज में एक पर्सेंट की सब्सिडी

सरकार ने 20 लाख रुपये तक के मकानों के 10 लाख रुपये तक के होम लोन पर ब्याज में एक पर्सेंट की सब्सिडी की घोषणा की है। इसके दायरे में सभी सरकारी बैंकों के होम लोन होंगे। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में वित्त विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के कुछ नए कदमों का एलान किया। इनमें 10 लाख रुपये तक के सभी होम लोन पर एक पर्सेंट ब्याज सब्सिडी देने की घोषणा भी शामिल है। लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि उन मकानों की कीमत 20 लाख रुपये से ज्यादा न हो। हालांकि यह नई रियायत सिर्फ एक साल के लिए ही होगी। इसके लिए उन्होंने एक हजार करोड़ रुपये का मौजूदा बजट में अतिरिक्त प्रावधान किए जाने का संशोधन भी पेश किया। वित्त मंत्री ने शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए एजुकेशन लोन के लाभ का दायरा बढ़ाते हुए अब छात्रों के कानूनी अभिभावकों को भी इसमें शामिल कर लिया। अब तक इसका लाभ सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर या फिर पति या पत्नी अथवा बच्चों तक ही सीमित था। मुखर्जी ने मिल्क, पोल्ट्री और मीट प्रॉडक्ट्स की प्रोसेसिंग को प्रेजरवेशन को बढ़ावा देते हुए अब इन्हें भी टैक्स हॉलिडे का लाभ देने की घोषणा की। अब तक यह लाभ सिर्फ फलों और सब्जियों तक सीमित था। वित्त मंत्री ने विकलांग और गंभीर विकलांगता से प्रभावित लोगों को इनकम टैक्स में राहत देते हुए उनकी मानक कटौती 75 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी।

Saturday, July 25, 2009

बोलो जी तुम क्या-क्या खरीदोगे?

यहां तो हर चीज बिकती है, बोलो जी तुम क्या-क्या खरीदोगे? इंजीनियरिंग की डिग्री खरीदोगे या मेडिकल की? टेक्निकल लाइन की हर डिग्री मिल जाएगी और वह भी सरकार से मान्यता प्राप्त! लॉ, सोशल वर्क, मास कॉम या होटल मैनेजमेंट की डिग्री चाहिए तो उसके भी इंस्टिट्यूट मौजूद हैं। माल सजा हुआ है। बस, ग्राहक को फंसाना है। यह किसी दुकान का विज्ञापन नहीं है बल्कि मौजूदा दौर के हायर एजुकेशन की कड़वी सचाई जिसे कुछ लोगों ने एक बड़ी मंडी में बदल दिया है। दिल्ली से बाहर निकलिए तो दूर-दूर तक ऐसे ही इंस्टिट्यूट नजर आएंगे। इनमें बहुत कम असली हैं और बाकी सब नकली। इन इंस्टिट्यूट्स को देखकर एक तरफ तो दिल बाग-बाग होता है कि शिक्षा के क्षेत्र में हम कितने अधिक विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं। हायर एजुकेशन की आज जितनी जरूरत है, सरकार उसे पूरा नहीं कर सकती। ऐसे में प्राइवेट इंस्टिट्यूट सरकार के मददगार ही साबित हो सकते हैं लेकिन अगले ही क्षण जब यह पता चलता है कि इनमें से बहुत -से इंस्टिट्यूट फर्जी हैं तो माथा ठनक जाता है। मेडिकल काउंसिल द्वारा ऐसे इंस्टिट्यूट्स को मान्यता देने का सवाल कई बार शक के दायरे में आ चुका है। अब एआईसीटीई जो इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी संस्थाओं को मान्यता देती है, उसके कामकाज पर भी संदेह पैदा हो चुका है। सीबीआई ने एआईसीटीई की मान्यता को जिस तरह बिकाऊ बताया है, उसे देखकर शिक्षा की कई दुकानों के पकवान फीके पड़ गए हैं। दरअसल, हायर एजुकेशन में जितनी अव्यवस्था है, उतनी शायद कहीं नहीं। लाखों रुपये की फीस भरने के बाद पैरंट्स के लिए बहुत -से संस्थान सिर्फ धोखा साबित होते हैं। यहां सिर्फ कुछ लाख रुपये का धोखा ही नहीं है बल्कि पूरी पीढ़ी के साथ धोखा है। एक युवक जो कल डॉक्टर - इंजीनियर बनने का सपना देखता है। उसका पूरा परिवार उस सपने में शामिल होता है लेकिन एक झटके में ही उसके सपने तब चकनाचूर हो जाते हैं जब उसे पता चलता है कि उसके हाथ में आई डिग्री फजीर् है। यह सच है कि स्कूली शिक्षा भी अब तक आम आदमी के सामने कड़वी सचाई ही रखती है लेकिन इस पर सरकार का किसी न किसी तरह का अंकुश जरूर नजर आता है। अगर पब्लिक स्कूल फीस में मनमानी वृद्धि करते हैं तो सरकार भले ही फीस कम न करा पाए, उन्हें धमकाती तो दिखाई देती ही है। कहने को तो यूजीसी हायर एजुकेशन पर नजर रखने वाली एजेंसी है लेकिन वह सिर्फ नजर ही रख पाती है, किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। यूजीसी की बेबसी इसी बात से साबित होती है कि उसकी साइट पर फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट तो है लेकिन उनके खिलाफ कोई कदम उठाने की क्षमता नहीं। एक परंपरा का निर्वाह करते हुए इस साल के शुरू में देशभर की ऐसी 22 यूनिवर्सिटियों की लिस्ट जारी कर दी गई जिन्हें यूजीसी फर्जी मानती है। इनमें दिल्ली की भी 6 यूनिवर्सिटी हैं। साल-दर-साल ऐसी लिस्ट जारी होती है लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। कारण यह है कि केस दर्ज कराने का काम राज्य सरकार का है। राज्य सरकारों के पास इतना समय नहीं है कि वे कोई कदम उठाएं। उनके पास और भी बहुत-से महत्वपूर्ण काम हैं। यूजीसी एक्ट के अनुसार अगर कोई फजीर् संस्थान चलाता है तो उसके खिलाफ सिर्फ एक हजार रुपये का जुर्माना ही किया जा सकता है। जुर्माने की राशि बढ़ाने और एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव बरसों से केंद सरकार के पास लटक रहा है। एक तरफ शिक्षा की बढ़ती दुकानें, दूसरी तरफ उन्हें मान्यता देने के नाम पर घपला और तीसरी तरफ यूजीसी की बेबसी। क्या सचमुच हायर एजुकेशन भगवान भरोसे नहीं चल रही। नए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल दसवीं क्लास में बोर्ड का एग्जाम खत्म करने जैसा कदम उठा रहे हैं लेकिन हायर एजुकेशन में तो एक क्रांति की जरूरत है। क्या वह इसकी पहल कर पाएंगे? यशपाल कमिटी ने भी नैशनल कमिशन फॉर हायर एजुकेशन की सिफारिश की है लेकिन ऐसे कमिशन के हाथ अगर खुरदरे होंगे, तभी कुछ भला हो पाएगा अन्यथा ऐसी दुकानों पर बैठे ठग लूटते ही रहेंगे।

Tuesday, July 21, 2009

कलाम के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बदसलूकी की गई।

एनडीए सरकार के दौर में आपको वह घटना तो याद होगी तो जब तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीज को अमेरिकी एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के नाम पर कपड़े उतारने पड़े थे। लेकिन अब तो हमारे देश के सम्मानित नागरिकों की इज़्ज़त हमारी सरजमीं पर ही उतर रही है। ताजा मामला पूर्व राष्ट्रपति और ' जनता के प्रेज़िडंट ' माने जाने वाले डॉ . एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ा हुआ है। भारतीय मिसाइल कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ . कलाम के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बदसलूकी की गई। पिछले दिनों अमेरिका की एक एयरलाइन कंपनी के कर्मचारियों ने सुरक्षा जांच के नाम पर डॉ . कलाम की जेब में रखा पर्स , उनका मोबाइल ही नहीं बल्कि जूते तक उतरवा लिए। कलाम के साथ यह घटना उस समय हुई जब वह सरकारी यात्रा पर कॉन्टीनेंटल एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या सीओ -083 से न्यू यॉर्क जा रहे थे।

डॉ. कलाम की बेइज़्ज़ती का जवाब कैसे दिया जाना चाहिए

इस दौरान डॉ . कलाम के साथ भारत सरकार के एक प्रोटोकॉल अधिकारी कस्टम , सीआईएसएफ , इमीग्रेशन और डायल के अफसर एयरोब्रिज के नजदीक पहुंचे। वहां मौजूद कॉन्टीनेंटल एयरलाइंस के अफसरों ने डॉ . कलाम को सुरक्षा जांच के लिए लाइन में लगने को कहा। प्रोटोकॉल अफसरों ने जांच अधिकारियों को डॉ . कलाम के कद और पद के बारे में सूचित भी किया। बावजूद इसके अपने देश की सरजमीं पर ही उन्हें एयरलाइंस के जांच अधिकारियों ने सुरक्षा संबंधी जांच में छूट देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने न केवल डॉ . कलाम का पर्स , मोबाइल स्कैन किया बल्कि उनके जूते तक उतरवा लिए। डॉ . कलाम ने अपनी सादगी का परिचय देते हुए अफसरों की मांग के मुताबिक न केवल जांच से सहयोग किया बल्कि बिना शिकायत विमान में सवार हो गए।
एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक , कॉन्टीनेंटल एयरलाइंस ने इंडियन एयरलाइंस की सब्सिडरी कंपनी एएसएल को सुरक्षा जांच की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। कलाम की जांच करने वाली टीम के सदस्य का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति को देखने के बाद वह असमंजस में पड़ गए लेकिन मौके पर मौजूद एयरलाइंस के विदेशी अधिकारी ने नो वन इज एग्जेम्टेड ( किसी को छूट नहीं ) कहते हुए जांच के आदेश दिए। इसी एयरलाइंस से जुडे़ एक अन्य अधिकारी ने घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा , कई बार इसी कंपनी के कर्मचारी भारत में प्रशिक्षण के लिए आते हैं और कभी सुरक्षा जांच से नहीं गुजरते हैं , लेकिन यह एयरलाइंस अक्सर भारत के प्रतिष्ठित नागरिकों और राजनयिकों की सुरक्षा जांच के नाम पर बेइज्जत करती आई है। जबकि , कानून के मुताबिक राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्रियों को एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से छूट मिलती है। लेकिन इस अमेरिकी एयरलाइन कंपनी ने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं।

राज्य सभा में गूंजा मामला , सरकार ने दिए जांच के आदेश

इस मामले की गूंज संसद में भी मंगलवार को सुनाई दी। बीजेपी ने राज्यसभा में इस मामले को जोरदार तरीके से उठाते हुए अमेरिकी एयरलाइन की उड़ानों पर रोक लगाने की मांग कर दी। वहीं , समाजवादी पार्टी ( एसपी ) के वरिष्ठ नेता जनेश्वर मिश्र ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यह मामला महज प्रक्रियागत या खानापूरी नहीं है। बल्कि इसके पीछे काले - गोरे , ऊंचे - नीचे इंसानों की सोच काम कर रही है। उन्होंने गांधी , मंडेला और राम मनोहर लोहिया जैसी हस्तियों का नाम इस सिलसिले में लेते हुए पूरे मामले को एक भारतीय का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर रंगभेद का मामला है। बीजेपी के राज्यसभा नेता अरुण जेटली ने भी कहा कि यह महज जांच का मुद्दा नहीं है बल्कि मामले की गंभीरता कहीं आगे तक है। सदन की भावनाओं को भांपते हुए सरकार की ओर से नागरिक उड्डयन मंत्री ( सिविल एविएशन मिनिस्टर ) प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि मैं सदन की भावनाओं का सम्मान करता हूं और इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

बच्चों को क, ख ग, घ वगैरह को पुराने ढर्रे से हटा कर फिल्मी सितारों के नाम के साथ संबोधित करके समझाने की कोशिश

'ए' से आमिर खान, 'बी' से बच्चन, 'सी' से चमेली वगैरह संबोधन से अगर बच्चों को पढ़ाया जाए तो यह किसी फनी मूवी से कम नहीं होगा। कॉमेडी फिल्म बनाने वाले तो इस तरह के मसाले की खोज में रहते ही हैं। दर्शकों को कुछ समय के लिए सिनेमा हॉल में हंसाने के लिए इस तरह का फिल्मी मसाला काफी होता है। लेकिन यहां हम जो बताने जा रहे हैं वह किसी फिल्म की कहानी नहीं है। न ही इस विषय पर कोई फिल्म बनने वाली है। असल में फनी कही जाने वाली यह असलियत उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों में अमली जामा पहने है। उत्तर प्रदेश में भी कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली से सटे नोएडा के एक नामी स्कूल की दो टीचरों ने हिंदी की वर्णमाला का ज्ञान कराने वाली बच्चों की एक पुस्तक तैयार की है। एक नामी इंग्लिश मीडियम स्कूल में इस पुस्तक से बच्चों को क, ख ग, घ वगैरह को पुराने ढर्रे से हटा कर फिल्मी सितारों के नाम के साथ संबोधित करके समझाने की कोशिश की गई है। मसलन 'ऋ' से हम बचपन से ही तपस्या करने वाले महानुभाव ऋषि का संबोधन करते आ रहे है। लेकिन इस पुस्तक में 'ऋ' से ऋतिक रोशन बताया गया है। इसी तरह 'ऐ' से बच्चे ऐश्वर्य राय सीख रहे हैं। इन सभी बातों को यूपी के राज्य मंत्री कलराज मिश्र ने कल उठाया। उनका कहना है कि इस तरह से ये कुछ स्कूल बच्चों को सही ज्ञान देने की बजाए फिल्मों की तरफ धकेल रहे हैं। श्री मिश्र के अनुसार हिंदी की वर्णमाला में ही खामियां नहीं हैं। यूपी के कई नामी अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली साइंस और अन्य विषय की पुस्तकों में भी कई खामियां हैं। मसलन एक पुस्तक के 2004-05 के एडिशन में जगदीश चंद बोस का जन्म 30 नवंबर 1858 छपा था। लेकिन इसी पब्लिकेशन्स की 2008-09 के एडिशन में श्री बोस का जन्म 13 नवंबर 1858 छपा है। यह पुस्तक यूपी के कई नामी अंग्रेजी स्कूलों में लगी हुई है।

Saturday, July 18, 2009

देशभर में मशहूर हो चुके प्रोफेसर मटुकनाथ को पटना यूनिवर्सिटी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया

लव गुरु के रूप में देशभर में मशहूर हो चुके प्रोफेसर मटुकनाथ को पटना यूनिवर्सिटी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यूनिवर्सिटी में शनिवार को हुई सिंडिकेट की बैठक में सर्वसम्मति से प्रोफेसर चौधरी को बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी के बी. एन. कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे। करीब छह साल पहले मटुकनाथ तब सुर्खियों में आए थे, जब उनकी पत्नी ने उन्हें और उनकी प्रेमिका व स्टूडेंट जूली को सरेआम पीटा था। इसके बाद 15 जुलाई 2006 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में भी प्रोफेसर चौधरी पत्र- पत्रिकाओं एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रेम पर व्याख्यान देते रहे। उनके विरुद्ध लगे आरोप की जांच करने के लिए कमेटी की रिपोर्ट पर कुलपति श्यामल लाल की अध्यक्षता में सिंडिकेट में प्रो. चौधरी की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया। हालांकि सिंडिकेट ने बी.एन. कॉलेज के ही अंग्रेजी के शिक्षक ऋषिकेश मिश्रा के निलंबन को चेतावनी देकर वापस ले लिया। उन्हें अपने काम करने के तरीके में सुधार करने की चेतावनी देने के साथ ही उनकी एक साल की वेतन बढ़ोतरी वापस ले ली गई।