Friday, December 26, 2014

रघुवर दास झारखंड के अगले मुख्यमंत्री

सीनियर बीजेपी नेता और जमशेदपुर पूर्व से विधायक रघुवर दास झारखंड के अगले मुख्यमंत्री होंगे। शुक्रवार को केंद्रीय पर्यवेक्षकों जेपी नड्डा और विनय सहस्त्रबुद्धे की मौजूदगी में बीजेपी विधायकों ने सर्वसम्मति से रघुवर दास को विधायक दल का नेता चुन लिया। हालांकि, यह एक औपचारिकता भर थी क्योंकि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने रघुवर के नाम पर पहले ही सहमति जता दी थी।
1980
से ही बीजेपी से जुड़े रहे रघुवर दास पहली बार 1995 में विधायक बने थे और उसके बाद लगातार पांचवीं बार विधायक बने हैं। इस बार उन्होंने करीब 70 हजार वोटों से जीत दर्ज की है। पिछड़े समुदाय से आने वाले रघुवर दास का जन्म बेहद गरीब पिरवार में हुआ था। उनके पिता जमशेदपुर में टाटा स्टील में खलासी का काम करते थे। छात्र जीवन में रघुवर दास जेपी के आंदोलन से जुड़े और उसके बाद सक्रिय राजनीति में आए।

रांची में पार्टी के प्रदेश कार्यालय में दिन के सवा ग्यारह बजे बैठक शुरू हुई। बैठक के फोटो सेशन के बाद मीडिया के लोगों को वहां से हटा दिया गया। शुरू में केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने विधायकों और राज्य इकाई के नेताओं से बात करके उनका नजरिया जाना। उसके बाद 12 बजे के करीब रघुवर दास विधायक दल का नेता चुन लिए जाने का ऐलान कर दिया गया। बीजेपी ऑफिस के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों का हुजूम लगा हुआ है और डोल-नगाड़े भी बजाए जा रहे हैं।
झारखंड की राजनीति में अर्जुन मुंडा के विरोधी माने जाने वाले रघुवार दास के नाम पर सहमति बनाने के साथ ही बीजेपी नेउस मिथक को भी तोड़ दिया, जिसके तहत कहा जाता रहा है कि झारखंड में आदिवासी ही मुख्यमंत्री हो सकता है। रघुवर ने गुरुवार को रांची में बीजेपी के बड़े नेताओं से मेल-जोल की गतिविधियां जिस प्रकार तेज कर दी थी, उससे भी लग रहा था कि उनको संकेत मिल गया था।
रघुवर ने गुरुवार को सीपी सिंह, सरयू राय समेत बीजेपी के वरिष्ठ विधायकों के आवास पहुंचकर गुफ्तगू की, जबकि शाम को वह बीजेपी कार्यालय गए, जहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम में था।

Tuesday, December 23, 2014

झारखंड में बीजेपी पूर्ण बहुमत से सरकार

जम्मू कश्मीर और झारखंड विधानसभा चुनावों में वोटों की गिनती जा रही हैं। रुझानों के मुताबिक, झारखंड में बीजेपी पूर्ण बहुमत से सरकार बना सकती हैं, लेकिन जम्मू और कश्मीर में खंडित जनादेश आता दिख रहा है। जम्मू-कश्मीर में अब इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि कौन-सी पार्टी किसके साथ मिलकर सरकार बना सकती है। इसी हालात पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली में बीजेपी की संसदीय बोर्ड की बैठक शुरू हो गई है। पीडीपी ने संकेत दिए हैं कि केंद्र में बीजेपी की सरकार हैं, इसलिए वह उसके साथ जा सकती है।

Monday, December 22, 2014

भविष्य के कार्यक्रमों के लिए गोपनीयता

विश्व हिंदू परिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाखुशी के कारण फिलहाल अपने घर वापसी कार्यक्रम पर रोक लगाने का फैसला किया है। वीएचपी के कार्यकर्ताओं को मौखिक आदेश दिया गया है कि फिलहाल घर वापसी कार्यक्रमों को रोक लिया जाए। यह निर्देश शनिवार को गुजरात के वलसाड में 500 ईसाई आदिवासियों के पुनर्धर्मांतरण के कार्यक्रम पर पैदा विवाद के बाद दिया गया है।
वीएचपी से जुड़े एक सूत्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त बताया, 'कहा जा रहा है कि शनिवार को हुए कार्यक्रम पर प्रधानमंत्री ने नाखुश जताई है।' इस बीच, मध्यप्रदेश में संगठन ने दावा किया है कि रविवार को 6 लाख लोगों की घर वापसी कराई गई। केरल में भी कम से कम 30 दलित आदिवासियों का पुनर्धर्मांतरण कराया गया। वीचपी सूत्र का कहना है कि फिलहाल 40 लाख धर्मांतरणों पर रोक लगाई गई है।
हालांकि वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने टीओआई से बातचीत में कहा कि कार्यकर्ताओं को कोई नया कार्यक्रम शुरू या बंद करने के कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। गुजरात के ही अन्य वीएचपी नेता का कहना है कि परिषद पर सरकार का कोई दबाव नहीं है और उसकी गतिविधियां पहले की योजना के तहत जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि परिषद इस बात को ध्यान में रखती है कि उसके काम से समाज में नफरत न फैले।
इससे पहले एक कार्यक्रम में बोलते हुए वीएचपी प्रमुख अशोक सिंघल ने कहा कि हिंदू संस्कृति और धर्म को पिछले 800 साल से दबाया गया है और अब हम कह सकते हैं कि एक ऐसी सरकार आ गई है जो हिंदुत्व की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
तोगड़िया ने टीओआई से फोन पर बातचीत में बताया, 'अब जिन कार्यक्रमों को हाईलाइट किया जा रहा है, वे दशकों से चल रही हैं। कुछ भी नया नहीं किया जा रहा है और न ही कुछ नया करने या बंद करने का कोई निर्देश दिया गया है।'
गुजरात वीएचपी के अनुसार परिषद के पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे कार्यक्रमों की डीटेल्स मीडिया को जारी न करें और भविष्य के कार्यक्रमों के लिए गोपनीयता बरतें। उनके मुताबिक डर है कि कहीं सरकार इन कार्यकर्मों को रोकने का प्रयास न करे।
सिंघल ने कहा कि पिछले 50 साल में किए गए उनके संघर्ष के कारण ही हिंदुओं ने 800 साल पहले 'खोए' दिल्ली के 'साम्राज्य' को फिर से पा लिया है। उन्होंने कहा कि हम धर्म बदलने नहीं दिल जीतने निकले हैं। एक दिन पहले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने घर वापसी कार्यक्रम का समर्थन करते हुए सरकार को चैलेंज किया कि अगर वह इसे रोकना चाहती है तो इसके लिए कानून बनाए।
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि धर्मांतरण पर बीजेपी का स्टैंड साफ है। धर्मांतरण से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई भी बीजेपी सरकार के डिवलेपमेंट के अजेंडे को बदल नहीं सकता। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि धर्मांतरण के मुद्दे पर भाजपा और संघ के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है। नायडू ने कहा कि केंद्र सरकार धर्मांतरण रोकने के लिए जबरन या एकतरफा कानून नहीं बनाएगी। इसे आम सहमति से ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो विपक्षी पार्टियां धर्मांतरण के खिलाफ बोल रही हैं उन्हें इस बिल के साथ आना चाहिए।

Saturday, December 20, 2014

एक और तरह की घर वापसी

विश्व हिंदू परिषद के 'घर वापसी' के नाम पर धर्मांतरण के कार्यक्रम ने जहां पूरे मुल्क में बवाल मचाया हुआ है, वहीं कुछ दलित विचारक मिलकर एक और तरह की घर वापसी करा रहे हैं। वीएचपी के कार्यक्रम के उलट इस घर वापसी से भारत के बेहद नाजुक सामाजिक तानेबाने को कोई नुकसान पहुंचता नहीं दिख रहा है लेकिन हिंदुओं के बीच के तानेबाने को यह बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। 
ये दलित लोग वाल्मीकि, खटिक, चर्मकार जैसे उपनामों को मिश्रा, पांडेय, तोमर और राठौड़ आदि में वापस ला रहे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष बिजय सोनकर शास्त्री के नेतृत्व में यह घर वापसी हो रही है। शास्त्री कहते हैं कि वह उन हिंदुओं का खोया हुआ सम्मान वापस दिला रहे हैं जिन्होंने इस्लामिक आक्रमणों के वक्त अपना धर्म छोड़ने के बजाय अपनी ऊंची जाति छोड़ दी थी। 

शास्त्री कहते हैं, 'हम उन लोगों की घर वापसी की बात करते हैं जिनके पुरखों ने जबरन या मजबूरी के तहत कोई और धर्म अपना लिया लेकिन उनका क्या जिन्होंने धर्म नहीं छोड़ा बल्कि उसकी रक्षा के लिए नीचे काम अपना लिए? क्या यह सही वक्त नहीं है कि उन्हें समाज में उनका खोया हुआ स्थान वापस दिलाया जाए?' 
डॉ. बीआर आंबेडकर के पोते और जानेमाने इतिहासकर प्रकाश आंबेडकर इस सिद्धांत को खारिज करते हैं। वह कहते हैं, 'बीजेपी सत्ता में आ चुकी है और इस्लाम का विरोध करके ही वे हिंदुओं को जोड़ सकते हैं।' 
शास्त्री बताते हैं कि वह इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए 500 से ज्यादा सेमीनारों में भाषण दे चुके हैं। उन्होंने आरएसएस और अन्य हिंदू संगठनों में भी इस विषय पर बात की है।

ई-सिगरेट, नए तरह का नशा

यूं तो ई-सिगरेट का इस्तेमाल सिगरेट छोड़ने वाले लोग एक माध्यम के तौर पर करते हैं, लेकिन भारत में बिना किसी नियम-कानून के चलते, दिन दोगुनी और रात चौगुनी गति से बढ़ रहा यह बाजार अब पूरी तरह से बेलगाम हो गया है। आलम यह है कि अभी तक सिगरेट छुड़ाने के लिए इलाज के एक माध्यम के रूप में बाजार में मिलने वाली यह ई-सिगरेट, नए तरह का नशा बनकर उभर रही है।
डॉक्टरों के अनुसार बाजार में मिलने वाली ई-सिगरेट्स में कई ब्रैंड ऐसे हैं, जिनमें सामान्य सिगरेट से भी कहीं ज्यादा मात्रा में निकोटीन है और यह सिगरेट की तरह ही खतरनाक है। 

इस साल अक्टूबर में मॉस्को में हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तंबाकू नियंत्रण सेमिनार में ई-सिगरेट को सामान्य सिगरेट के जैसे ही खतरनाक और नुकसानदायक माना। वहीं सितंबर में दिल्ली में दक्षिण-एशियाई देशों की बैठक में भी इसे नुकसानदायक करार दिया गया है। यही कारण है कि भारत में ई-सिगरेट पर कड़े नियम बनाने की मांग बढ़ गई है। 
भारत में सार्वजनिक स्थान पर सिगरेट पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन ई-सिगरेट पीने पर कोई नियम-कानून नहीं है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ई-सिगरेट मंगाने का ट्रेंड बहुत ज्यादा बढ़ा है। मुंबई की हील्स फाउंडेशन के डॉ. प्रकाश गुप्ता का कहना है कि ई-सिगरेट में निकोटीन के ऐसे उत्पाद हैं, जिन्हें बिना किसी रोक-टोक के आसानी से इंटरनेट से मंगाया जा रहा है।
भारत में तंबाकू पर बने कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू प्रॉडक्ट नहीं दिए जाते, जबकि इंटरनेट के माध्यम से ई-सिगरेट किसी भी उम्र के लोग मंगा रहे हैं। 
गौरतलब है कि ई-सिगरेट बनाने वाली कंपनियां इसे सामान्य सिगरेट से कम हानिकारक के तौर पर प्रचारित कर रही हैं, लेकिन डॉक्टरों की राय इससे जुदा है। टाटा अस्पताल के हेड ऐंड नेक सर्जन, डॉ. पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि किसी भी रिसर्च के माध्यम से यह साबित नहीं हुआ है कि ई-सिगरेट, सिगरेट के 'डी-अडिक्शन' के लिए किसी भी तरह से कारगर साबित हुई है बल्कि, यह उतनी ही नुकसानदायक है जितनी सामान्य सिगरेट। कई ब्रैंड के ई-सिगरेट में 36 मिलीग्राम तक निकोटीन की मात्रा होती है, जो उसे सामान्य सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक बनाती है।
 ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाले ऐसा उपकरण है, जो निकोटीन को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है। ई-सिगरेट, देखने में बिलकुल सामान्य सिगरेट या सिगार जैसी प्लास्टिक या मेटल से बनी होती है। बाजार में ई-सिगरेट के 7764 से भी ज्यादा फ्लेवर उपलब्ध हैं। 

Thursday, December 18, 2014

2011 से 2014 के बीच 29 हजार करोड़ रुपये का घोटाला

डायरेक्टॉरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने खुलासा किया है कि कुछ कंपनियां अपने पावर प्लांट के लिए इंडोनेशिया से आयातित कोयले के मूल्य में हेरफेर कर रही हैं। डीआरआई ने खुलासा किया है कि कोयले के आयात मूल्य को ज्यादा दिखाकर 2011 से 2014 के बीच 29 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया।
डीआरआई ने महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल में 80 से अधिक शिपिंग कंपनियों, एजेंट और लैबों पर छापा मारा। यहां से जब्त किए गए दस्तावेजों से आयातित कोयले के वास्तविक मूल्य का पता चला है। डीआरआई ने कोयले की जांच करने वाली लगभग सभी लैब में छापा मारा ताकि आयातित कोयले की कैलरी क्षमता की रिपोर्ट की पुष्टि की जा सकते।

आयात किए गए कोयले का मूल्य अधिक होने से टैरिफ पर भी प्रभाव पड़ता है, जो कंज्यूमर को देना पड़ता है। दूसरे शब्दों में कहे, अगर कोयले के आयातित मूल्य को अधिक नहीं दिखाया गया तो पावर टैरिफ शायद एक रुपये प्रति यूनिट से कम होगा। डीआरआई इस घोटाले में पब्लिक सेक्टर कंपनियों के शामिल होने भी जांच कर रही है।
डीआरआई के एक अधिकारी का कहना है कि प्रतिष्ठित कंपनियों समेत लगभग सभी इंपोर्टर आयातित कोयले के दाम बढ़ाकर दिखाने में शामिल हैं। डीआरआई द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि पब्लिक सेक्टर समेत भारतीय कंपनियों ने 2012-13 में इंडोनेशिया से 77 मिलियन टन कोयला आयात किया था। डीआरआई के अधिकारियों के मुताबिक, आयात किए गए कोयले के मूल्य उसकी असल कीमत से दोगुना तक ज्यादा दिखाए गए।
सूत्रों का कहना है कि कंपनियां विदेशों में पैसा जमा करने के लिए इस तरीके को अपना रही हैं। इंडियन कंपनियां किसी मध्यस्त के माध्यम से कोयले के बढ़ाए गए मूल्य के आधार पर भुगतान करती हैं, लेकिन जिन कंपनियों से कोयला खरीदा जाता है उन्हें कम भुगतान किया जाता है। इस तरह कंपनियां बाकी बचा हुआ पैसा विदेशों में जमा कराने में कामयाब हो जाती है। मध्यस्त कमीशन के आधार पर यह काम करते हैं। कुछ मध्यस्त सीधे कंपनी से भी जुड़े होते हैं।

Monday, December 15, 2014

विज्ञापन से जुड़ा कागज महासचिव की मेज पर जमा

सरकार ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि क्रिसमस के दिन 'सुशासन दिवस' मनाने के लिए सीबीएसई के स्कूलों को खोले रखने के लिए निर्देश दिए गए हैं। राज्यसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष ने भारी विरोध जताया, जिस पर सरकार की ओर से सफाई दी गई कि ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। सरकार ने कहा कि इस विषय पर केवल एक ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई है। 
विपक्ष द्वारा सोमवार को शून्यकाल में यह मुद्दा उठाए जाने पर सदन के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'खबर तथ्यात्मक रूप से गलत है।' उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री ने उन्हें सूचित किया है कि ऐसे कोई निर्देश नहीं जारी किए गए हैं। केवल एक ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता होगी। बात बस इतनी ही है। 

इससे पहले सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि स्कूलों से कहा गया है कि वे सुशासन दिवस मनाने के लिए 25 दिसंबर को अपना विद्यालय खोले रखें। उन्होंने कहा, 'इस बारे में सरकार की ओर से आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले महात्मा गांधी के जन्मदिवस के दिन पर स्वच्छता दिवस मनाया गया था। 
दोपहर 12 बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने पर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने अपना आरोप दोहराया कि धर्मांतरण का मुद्दा एक बड़े पैकेज का हिस्सा है, जिसके जरिये देश के संवैधानिक स्वरूप पर प्रहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन 'सुशासन का अभियान' चलाने के लिए सरकारी विज्ञापन जारी किए गए हैं और उस दिन छुट्टी नहीं होगी। 
सभापति हामिद अंसारी द्वारा इस बात को प्रमाणित करने की अनुमति दिए जाने पर येचुरी ने विज्ञापन से जुड़ा कागज महासचिव की मेज पर जमा कर दिया। इसके बाद कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने नियम 267 के तहत अपने नोटिस की बात दोहराई, जिस पर अंसारी ने कहा कि आपको सूचित किया जा चुका है कि आपका नोटिस स्वीकार नहीं किया गया है। 
विपक्षी सदस्यों द्वारा प्रश्नकाल नहीं चलने देने पर सभापति ने बैठक शुरू होने के दो मिनट बाद ही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। बैठक फिर शुरू होने पर जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा, 'देश जिस स्थिति से गुजर रहा है, उसमें प्रश्नकाल ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। देश के मौजूदा हालात अराजकता पैदा कर सकते हैं। अगर इस विषय पर सदन में चर्चा नहीं हुई तो दुष्परिणाम सामने आएंगे।' 
यादव ने कहा, 'इस मुद्दे (धर्मांतरण) पर सरकार और विपक्ष के बीच आम सहमति बनना जरूरी है।' इस पर संसदीय कार्य राज्यमंत्री नकवी ने कहा, 'हम देश में शांति और सौहार्द के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा संकल्प है कि कोई ताकत देश में शांति और सौहार्द को नहीं बिगाड़ पाएगी। अगर आसन चाहे तो हम किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार हैं।' हालांकि कांग्रेस, जेडी(यू), सीपीएम, तृणमूल कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के सदस्य मंत्री के बयान पर असंतोष जताते हुए अपनी मांग पर अड़े रहे। हंगामा जारी रहने पर सभापति ने सदन की बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।