Monday, October 27, 2014

केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को ब्लैक मनी मामले में एक अडिशनल हलफनामा दाखिल कर तीन कालेधन धारकों के नाम बताए

केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को ब्लैक मनी मामले में एक अडिशनल हलफनामा दाखिल कर सकती है। सरकार इस हलफनामे में सफाई देगी कि उस कदम का गलत अर्थ निकाला गया कि जिन विदेशी बैंकों के अकाउंट्स की जांच इनकम टैक्स लॉ के तहत शुरू नहीं की गई है उन नामों का खुलासा नहीं होगा। केंद्र सरकार इस हलफनामे में उन तीन भारतीयों के नामों का खुलासा करेगी जिनके खिलाफ विदेशी बैंकों में गोपनीय तरीके से पैसे रखने के मामले में जांच शुरू हो गई है। सरकार आगे चलकर ब्लैक मनी से जुड़े अन्य नामों का भी खुलासा करेगी जिनके खिलाफ जांच शुरू हो जाएगी। इन नामों में यूपीए सरकार से जुड़े लोग भी हैं।
सरकार को लगता है कि ब्लैक मनी मामले में अवैधता की जांच शुरू किए बिना नामों का खुलासा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा जिसमें आरबीआई के नियमों के मुताबिक किसी भी भारतीय को यह हक है कि वह हर साल विदेशी बैंक में वैध तरीके से 1 लाख 25 हजार डॉलर जमा कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील राम जेठमलानी की याचिका पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह बेईमानी से विदेशी बैंकों में जमा किए गए भारतीय पैसों को वापस लाने के लिए हाई लेवल का टास्क फोर्स गठित करे। इसमें सारी खुफिया जानकारी जुटाकर कानूनी प्रक्रिया के तहत विदेशी बैंकों में जमा अवैध धनों की शिनाख्त की बात कही गई थी। कोर्ट के आदेश पर तब की यूपीए सरकार ने जेठमलानी से उन भारतीयों नामों का खुलासा किया था जिनके अकाउंट लिचटेंस्टाइन बैंक में थे और जर्मन सरकार ने दोहरे कराधान बचाव समझौते के तहत सूचना मुहैया कराई थी।
इस मामले में नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि जर्मनी की आपत्तियों के कारण वह उन भारतीयों के नामों खुलासा तब तक नहीं कर सकती है जब तक कि उनके खिलाफ फाइनैंशल लॉ के तहत अनियमितता की जांच शुरू नहीं हो जाती। इससे पहले नामों का खुलासा करने से द्विपक्षीय समझौते की शर्तों का उल्लंघन होगा।
इसमें कहा गया है कि भारत सरकार अमेरिका समेत दूसरे देशों से कुछ महत्वपूर्ण दोहरे कराधान बचाव समझौते में लगी है। कोर्ट को बताया गया है कि इन संधियों के माध्यम से ही विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के ब्लैक मनी से जुड़ी सूचनाओं के स्रोत तक पहुंचा जा सकता है। सरकार ने कोर्ट से कहा था कि यदि हम समझौतों के करारों का उल्लंघन करते हैं तो विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा छुपाकर रखे गए पैसों से जुड़े डेटा दूसरे देश साझा करने से इनकार कर देंगे।
केंद्र सरकार ने इस हलफनामे के जरिए कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह उन भारतीयों के नामों का खुलासा करने के लिए तैयार है जिनके विदेशी बैंक खातों की जांच की सिफारिश की गई है। जेठमलानी ने सरकार के इस स्टैंड पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार सब कुछ रहस्य बनाकर रखना चाहती है। उन्होंने दोहरे कराधान बचाव समझौते के बारे में कहा था कि यह सब कुछ छुपाने की चाल है।


Friday, October 24, 2014

132 करोड़ रुपये के बिजली के बिल का झटका

हरियाणा के एक पानवाले को दिवाली के मौके पर गिफ्ट तो नहीं लेकिन 132 करोड़ रुपये के बिजली के बिल का झटका जरूर लग गया। दरअसल इस पानवाले को 132 करोड़ का बिजली बिल मिला है। सोनीपत के गोभाना में एक दुकान चलाने वाले राजेश का अक्टूबर महीने में 132.29 करोड़ का बिजली आया है।
राजेश ने कहा, 'मैं इस बिल की राशि को पढ़कर हैरान रह गया। ऐसा नहीं है कि कि बिल की राशि सिर्फ अंकों में गलत लिखी थी बल्कि पूरी राशि शब्दों में भी लिखी थी।'
उन्होंने कहा, 'मैं एक साधारण आदमी हूं और मेरी किराए पर एक छोटी सी दुकान है। मैं सिर्फ एक बल्ब और एक पंखे का प्रयोग करता हूं। मेरा बिजली का बिल एक हजार रुपये से कम आता है। यह बिल हैरान कर देने वाला है।'

उन्होंने कहा कि वह बिल को ठीक कराने के लिए बिजली विभाग के दफ्तर जाएंगे। यह बिल उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) द्वारा जारी किया गया है।
अतीत में भी हरियाणा का बिजली विभाग ऐसी गलतियां कर चुका है। हरियाणा के नारनौल शहर के मुरारी लाल को अप्रैल 2007 में बिजली विभाग ने ऐसा ही झटका देते हुए उनके दो बेडरूम के फ्लैट के लिए उन्हें 234 करोड़ रुपये का बिल भेज दिया था।

Wednesday, October 22, 2014

शुभेच्छा

सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभेच्छा ।


(डॉ. राजेन्द्र कुमार गुप्ता)

चिदंबरम की जान लेने की साजिश

रीटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की इजाजत देने के यूपीए सरकार के फैसले की वजह से एक संगठन ने प्रधानमंत्री कार्यालय के तत्कालीन राज्यमंत्री वी नारायणस्वामी और तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम की जान लेने की साजिश रची थी। यह आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी के छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की है। 32 पेज की यह चार्जशीट 30 सितंबर को पुडुचेरी की एक विशेष अदालत में दाखिल की गई थी।
हमारे पास मौजूद चार्जशीट की कॉपी में कहा गया है कि इन छह लोगों ने 29 जनवरी को नारायणस्वामी और 25 फरवरी को चिदंबरम की जान लेने की योजना बनाई थी। चार्जशीट के मुताबिक, आरोपित लोग रीटेल सेक्टर में एफडीआई की इजाजत देने के यूपीए सरकार के फैसले से नाराज थे और उनका मानना था कि नारायणस्वामी और चिदंबरम की इस नीति को तैयार करने में बड़ी भूमिका थी। एनआईए का कहना है कि पुडुचेरी में नारायणस्वामी के घर के बाहर खड़ी एक कार के नीचे एक बम रखा गया था, जिसे पुलिस ने समय रहते डिफ्यूज कर दिया। दूसरी तरफ, तमिलनाडु के शिवगंगा में चिदंबरम के घर में भी एक बम प्लांट किया गया था। एनआईए के मुताबिक, इस संगठन ने हालांकि राज्य के बाहर के किसी नेता के खिलाफ ऐसा कुछ करने की नहीं सोची थी।

यूपीए सरकार ने मल्टि-ब्रैंड रिटेल में 51% एफडीआई को साल 2012 में मंजूरी दी थी। एनआईए का कहना है कि तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी के इन छह मेंबरों ने साजिश रचने के लिए कई बैठकें की थीं। एनआईए ने मदुरै में कैटरिंग का काम करने वाले तिरुसेल्वम को मुख्य षड्यंत्रकारी बताते हुए कहा, 'इन बैठकों में इन लोगों ने तमिल लोगों के अधिकारों, तमिल और भारतीय मछुआरों के मुद्दे, कुडनकुलम परमाणु संयंत्र परियोजना और रीटेल में एफडीआई पर भारत सरकार की नीतियों की निंदा की थी और उनके प्रति असंतोष जताया था।' एनआईए का कहना है कि एक अन्य आरोप जॉन मार्टिन ने इन बैठकों की मेजबानी की थी और वह 'वॉलमार्ट, रिलायंस के पक्ष में नीतियां बनाए जाने के खिलाफ था।'
एनआईए का कहना है कि आरोपियों ने तीन पाइप बम बनाए और तिरुसेल्वम ने पहला बम 29 जनवरी को नारायणस्वामी के घर के बाहर एक कार के नीचे लगाया था। उसने ऐसा मुथुकुमारन को श्रद्धांजलि देने के लिए किया था, जिसने श्रीलंका में गृहयुद्ध के विरोध में 2009 में उसी दिन खुद को आग लगाकर जान दे दी थी।
एनआईए का कहना है, 'दूसरा पाइप बम तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के शिवगंगा के मानगिरि वाले आवास में फरवरी 2014 में रखा गया था।' एनआईए का कहना है कि आरोपियों ने उस दिन यानी 25 फरवरी 2014 को चिदंबरम के घर में कुछ पैंफलेट्स भी छोड़े थे।
चार्जशीट में कहा गया है, 'इन पैंफलेट्स में केंद्र सरकार के खिलाफ बातें की गई थीं। देश में बहुराष्ट्रीय रिटेल कंपनियों की एंट्री, नदियों के पानी को लेकर विवाद, राजीव गांधी मर्डर केस में दोषी तीन तमिलों की रिहाई, कुडनकुलम में न्यूक्लियर प्लांट जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ बयान थे।'

Tuesday, October 21, 2014

सरकार विदेशों में कथित तौर पर काला धन जमा करने वाले कुछ लोगों के नाम सुप्रीम कोर्ट को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मंत्रिपरिषद को बताया है कि सरकार विदेशों में कथित तौर पर काला धन जमा करने वाले कुछ लोगों के नाम सुप्रीम कोर्ट को बताने जा रही है। ऐसे लोगों के नाम बताए जाएंगे, जिनके खिलाफ इस मामले में जांच जारी है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को दिवाली से पहले अपने मंत्रियों को दिए डिनर के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ नाम बताए जाएंगे। केंद्रीय कैबिनेट में शिवसेना के एकमात्र प्रतिनिधि अनंत गीते भी इस डिनर में मौजूद थे।
बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के दौरान विदेशों में भारतीयों द्वारा जमा कराए गए काले धन के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और वादा किया था कि उसकी सरकार इसे वापस लाएगी। सरकार ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि संबंधित देशों से हुए समझौते के तहत ब्लैक मनी जमा करने वालों के नाम सार्वजनिक तौर पर उजागर नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन जांच एजेंसियों को नाम दिए जा सकते हैं। इसे लेकर बीजेपी पर अपने रुख से यू-टर्न लेना का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और दूसरी विरोधी पार्टियों ने हमला बोला था।

विपक्ष के आरोपों के जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था, 'हमें नामों को सार्वजनिक करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उन्हें विधिवत कानूनी प्रक्रिया के तहत ही सार्वजनिक किया जा सकता है। डीटीएए (दोहरे कराधान से बचाव की संधि) इसमें बाधा बन रही है, जिस पर जर्मनी और तत्कालीन यूपीए सरकार के बीच 19 जून, 1995 को हस्ताक्षर किया गया था।' जेटली ने यह बयान स्विट्जरलैंड से लौटे प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद दिया था। अधिकारियों के दौरे से यह बात भी सामने आई थी कि जिनीवा के एचएसबीसी बैंक में 700 भारतीयों के अकाउंट हैं। यह लिस्ट भारत को फ्रेंच अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई गई है।

Monday, October 20, 2014

सरकार के लिए इकनॉमिक रिफॉर्म्स करना आसान

महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव के बाद अगले 1 साल तक सिर्फ 2 राज्यों में चुनाव होंगे। इससे नरेंद्र मोदी सरकार के लिए इकनॉमिक रिफॉर्म्स करना आसान हो सकता है। आर्थिक सुधारों की शुरुआत संसद के शीतकालीन सत्र से की जा सकती है। उसके बाद अगले फाइनैंशल ईयर का बजट पेश किया जाएगा। अगर सरकार रिफॉर्म्स की राह पर आगे बढ़ती है तो इकनॉमिक ग्रोथ तेज करने और रोजगार के मौके बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव के चलते मोदी सरकार ने कुछ अहम फैसलों को टाल दिया था। अगले साल की शुरुआत में सिर्फ जम्मू-कश्मीर और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए सरकार के लिए पॉलिसी रिफॉर्म करना आसान हो सकता है। अगले साल के अंत में बिहार में चुनाव होंगे, जहां बीजेपी जेडी (यू) से सत्ता छीनने की कोशिश करेगी।
 
पॉलिसी रिफॉर्म्स की शुरुआत सरकार ने शनिवार शाम से ही कर दी। उसने डीजल को डीकंट्रोल कर दिया और गैस के दाम बढ़ाए। इससे एनर्जी एक्सप्लोरेशन और प्रॉडक्शन बढ़ाने में मदद मिलेगी। बीजेपी के एक सीनियर लीडर ने बताया कि आने वाले दिनों में और बड़े रिफॉर्म्स का ऐलान हो सकता है। बड़े सरकारी अफसरों ने भी इसकी पुष्टि की। 
पॉलिसी मेकिंग से जुड़े एक बड़े अफसर ने कहा, 'सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि वह पेंडिंग रिफॉर्म्स पर आगे बढ़ेगी। जहां भी रिफॉर्म की जरूरत होगी, उसे किया जाएगा और हम इसके लिए तैयार हैं।' इस मामले में बार्कलेज कैपिटल के सिद्धार्थ सान्याल ने कहा, '2015 के अंत तक सरकार के पास काफी काम करने की गुंजाइश है। इस दौरान सिर्फ दो राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।' सरकार का अगला कदम कैबिनेट विस्तार का हो सकता है। इसमें कुछ अहम पोर्टफोलियो में बदलाव किए जा सकते हैं।
 
पिछले हफ्ते ब्यूरोक्रेसी में भी बड़े बदलाव हुए थे। फाइनैंस मिनिस्ट्री में इस बदलाव के बाद जो नई टीम बनी है, उससे इकनॉमिक रिफॉर्म्स तेज किए जाने के संकेत मिलते हैं। सरकार इकनॉमिक ग्रोथ तेज करने की कोशिश कर रही है। मोदी सरकार ने अरविंद सुब्रमण्यन को नया चीफ इकनॉमिक एडवाइजर बनाया है, जबकि राजीव महर्षि को इकनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी का पद दिया गया है।
 
अप्रैल-जून क्वॉर्टर में जीडीपी ग्रोथ 5.7 पर्सेंट रही थी, जो 9 तिमाहियों में सबसे अधिक है। हालांकि जुलाई और अगस्त महीने में से हरेक में इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन में सिर्फ 0.4 पर्सेंट ही रही। मोदी सरकार इनवेस्टमेंट रिवाइवल की कोशिश भी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के कैंसल किए गए कोल ब्लॉक्स की नीलामी की तैयारी चल रही है। फाइनैंशल सेक्टर रिफॉर्म्स पर भी काम हो रहा है, जिसका सुझाव फाइनैंशल सेक्टर लेजिस्लेटिव रिफॉर्म्स कमिशन (एफएसएलआरसी) ने दिया था। इंश्योरेंस रेग्युलेशन, जीएसटी, इनफ्लेशन को लेकर सॉलिड स्ट्रैटेजी, लेबर रिफॉर्म्स और बिजनस को आसान बनाने वाले प्रशासनिक उपाय शामिल 

Thursday, October 16, 2014

नरेंद्र मोदी के जुए पर फैसला

महाराष्ट्र और हरियाणा के वोटरों ने नरेंद्र मोदी के जुए पर अपना फैसला सुना दिया है। क्या इस जुए में उन्हें जीत मिलेगी? मोदी के लिए महाराष्ट्र में शिवसेना से 25 साल पुराना गठबंधन तोड़कर अकेले चुनाव लड़ना जुआ ही था। इसी तरह से बीजेपी ने हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा का समर्थन लेकर अकालियों के साथ रिश्ते को दांव पर लगाया है। 
जिंदगी में जो लोग कुछ हासिल करते हैं, उन्हें रिस्क लेने पड़ते हैं। किसान के लिए मॉनसून सीजन में खेती अब भी जुआ है। उद्यमियों के लिए नई टेक्नॉलजी पर दांव लगाना जुआ हो सकता है। युवा प्रेमियों के लिए नकारे जाने के डर के बीच अपनी चाहत का इजहार करना भी जुआ है। उन्हें तो मोदी राज में नैतिकता के ठेकेदारों के डर का भी सामना करना है।  नेताओं को हमेशा फैसले करने पड़ते हैं और किसी भी फैसले में आपको चुनना पड़ता है। इसमें गलत चॉइस का डर छिपा रहता है। गैंबलर वह होता है, जो ऐसा दांव लगाए, जो वह नहीं लगाना चाहता है। क्या मोदी ने भी ऐसा किया है? लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करके केंद्र में आने वाले मोदी ने विधानसभा चुनाव के पहले फेज से झारखंड और दिल्ली को अलग रखा है। इस फेज में चुनाव सिर्फ महाराष्ट्र और हरियाणा में हो रहे हैं। 
अगर विधानसभा चुनाव में जीत मोदी के लिए इतना महत्वपूर्ण है, तो उन्होंने शिवसेना के साथ बरसों पुराना गठबंधन क्यों तोड़ा? यहीं पर मोदी के जुए वाली पहलू आता है। उन्हें पता है कि उनकी अपील के चलते लोकसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना को महाराष्ट्र में शानदार जीत मिली थी। इसलिए वह अपनी लोकप्रियता का फायदा उठाकर राज्य में बीजेपी को बड़ा पार्टनर बना सकते हैं। उन्होंने अपनी लोकप्रियता दांव पर लगाकर शिव सेना के साथ अलायंस तोड़ा है। 
हरियाणा में बीजेपी के पास जाना-पहचाना चेहरा नहीं है। यहां की राजनीतिक लड़ाई 'मैनिपुलेटिव ट्रेडर' और 'सम्मानित किसान' के बीच होती है। इसलिए मोदी ने पुराने सहयोगियों को छोड़कर इस पारंपरिक ट्रेंड को बदलने का जुआ खेला है। इसके लिए भी उन्होंने अपनी लोकप्रियता दांव पर लगाई है  यह मोदी का जुआ खेलने वाला पहलू ही था, जिसके चलते वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में ट्रेड फैसिलिटेशन डील से भारत पीछे हट गया, जबकि देश को पिछले साल पहले ही बाली में हुई डब्ल्यूटीओ मीटिंग में सब्सिडी सिस्टम को बदलने के लिए चार साल की मोहलत मिल चुकी थी। ये बदलाव डब्ल्यूटीओ के रूल्स के हिसाब से किए जाने थे। 
मोदी को लगता है कि भारत फूड सिक्यॉरिटी पर कितना पैसा खर्च करता है, इसमें दखल देने का अधिकार किसी को नहीं है। हालांकि डब्ल्यूटीओ में बने गतिरोध को आसानी से सुलझाया जा सकता था। इसके बावजूद फूड सब्सिडी पर तत्काल रियायत की शर्त रखकर मोदी ने जुआ खेला। उन्हें लगा कि वह इसके लिए अमेरिका को मना लेंगे। इससे उन्हें चाहने वाली जनता वर्ल्ड स्टेज पर देख पाती कि मोदी का सीना 56 इंच का है। हालांकि, यह दांव बेकार गया।
अमेरिका ने ट्रेड फैसिलिटेशन पर भारत को एकतरफा रियायत नहीं दी। पाकिस्तान के साथ बॉर्डर पर फायरिंग मामले में भी उन्होंने यही जुआ खेला। उन्हें लगा कि पहले पाकिस्तान की आर्मी को झुकना होगा। हालांकि महाराष्ट्र के जुए के मोदी के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं। अगर वह यह जुआ जीतते हैं तो इससे उन्हें आगे बड़े दांव लगाने का हौसला मिलेगा। बहरहाल जो भी हो, पासा तो वह फेंक ही चुके हैं।