Thursday, October 16, 2014

पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी

मोबाइल फोन उपभोक्ता देश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाने के बावजूद अपना वर्तमान नंबर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए जल्द ही पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) की सुविधा मिलने वाली है। वर्तमान में मोबाइल उपभोक्ताओं को समान सेवा क्षेत्रों में ही ऑपरेटर बदलने की सुविधा है। मसलन, दिल्ली एनसीआर में कोई उपभोक्ता दिल्ली एनसीआर में ही नंबर बदले बिना ऑपरेटर बदल सकता है।
एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी लागू करने के लिए 31 मार्च, 2015 की समय सीमा तय की है। उसने कहा, 'टेलिकॉम कमिशन ने पूर्ण एमएनपी पर ट्राई की सिफारिशें स्वीकार ली हैं।' कमिशन के निर्णय को अंतिम मंजूरी के लिए अब टेलिकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद के सामने रखा जाएगा।

पूर्ण एमएनपी के तहत उपभोक्ता देश में कहीं भी जाने पर अपना पुराना नंबर बरकरार रख सकेंगे। ट्राई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 13 करोड़ लोगों ने 31 अगस्त तक एमएनपी सुविधा के लिए अनुरोध किया है। ट्राई ने पूर्ण एमएनपी पर अपनी सिफारिश में प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की तिथि से छह माह का समय दूरसंचार कंपनियों को देने का सुझाव दिया है ताकि वे अपने नेटवर्क में आवश्यक बदलाव कर सकें।

Tuesday, October 14, 2014

पाकिस्तान को यूएन ने झटका दिया

कश्मीर मामले पर पाकिस्तान को यूएन ने झटका दिया है। कश्मीर मामले में दखल देने की पाकिस्तान की मांग को संयुक्त राष्ट्र संघ ने ठुकरा दिया है। यूएन ने कहा कि है भारत और पाकिस्तान मिलकर इस मसले को सुलझाएं।
पिछले हफ्ते के आखिर में पाकिस्तान ने भारत पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाते हुए यूएन को एक चिट्ठी भेजी थी। इसमें कहा गया था कि भारत लगातार एलओसी पर फायरिंग कर रहा है। इसके साथ ही मांग की गई थी कि लंबे समय से लटके पड़े कश्मीर मामले को सुलझाने के लिए यूएन पहल करे।
यूएन ने पाकिस्तान की इस चिट्ठी पर जवाब देते हुए कश्मीर मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान का प्रस्ताव ठुकराते हुए यूएन ने कहा कि इस मसले को भारत और पाकिस्तान दोनों को सुलझाना होगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कश्मीर का राग आलापा था। उन्होंने कश्मीर में जनमतसंग्रह की बात उठाते हुए भारत पर ताना मारा था कि वह 6 दशक पहले किए गए इस वादे को पूरा नहीं कर पाया है।

Thursday, October 9, 2014

कई तथ्यों को छिपाया गया

एम्स के सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को पद से हटाने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हेल्थ मिनिस्टर डॉ. हर्षवर्धन से फोन पर चर्चा की और उनसे विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद हेल्थ सेक्रेटरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा, अतिरिक्त प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा और कैबिनेट सचिव अजीत सेठ को पांच पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में प्रधानमंत्री को भी पूरी जानकारी नहीं दी गई है। कई तथ्यों को छिपाया गया है।
प्रधानमंत्री और हेल्थ मिनिस्टर के बीच संजीव चतुर्वेदी को लेकर हुई बातचीत और उन्हें सौंपी गई रिपोर्ट की कॉपी एनबीटी के पास है। इसमें कहीं भी बीजेपी के महासचिव जे पी नड्डा का नाम नहीं है, जबकि हेल्थ मिनिस्ट्री के रिकॉर्ड से साफ है कि नड्डा पिछले एक साल से संजीव को सीवीओ पद से हटाने के लिए लेटर लिख रहे थे। नड्डा ने इस बारे में अंतिम लेटर डॉ हर्षवर्धन को हेल्थ मिनिस्टर बनने पर 25 जून को लिखा था, जिसमें उन्होंने संजीव को सीवीओ के पद से हटाने के साथ-साथ अपनी पसंद के नए सीवीओ लाने, संजीव को उनके कैडर वापस भेजने और संजीव के द्वारा शुरू की गई जांचों को रोकने की मांग की थी। इस लेटर के बाद ही मिनिस्ट्री ने संजीव को हटाने का प्रस्ताव लाया।
तीन महीने पहले जिस हेल्थ सेक्रेटरी ने नड़्डा के लेटर के बाद 23 मई 2014 को यह निर्णय लिया था कि संजीव की नियुक्ति में सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं, उन्होंने ही पीएमओ को अपनी रिपोर्ट में संजीव को हटाने का पुरजोर समर्थन किया है। हेल्थ सेक्रेटरी ने लिखा है कि संजीव की नियुक्ति को एम्स की जीबी और आईबी से अप्रूवल नहीं थी जबकि उन्होंने 23 मई को अपनी फाइल पर लिखा है कि संजीव की नियुक्ति को जीबी की 144वीं मीटिंग नवंबर 2010 और आईबी की 144वीं मीटिंग जनवरी 2012 में अप्रूवल मिल चुका है।

रिपोर्ट में पीएमओ को अधूरी जानकारी दी गई है जिसमें यह भी कहा गया है कि संजीव को एम्स के सीवीओ के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है, जबकि इंस्टिट्यूट द्वारा 7 जुलाई 2012 को जारी नियुक्ति लेटर में स्पष्ट लिखा है कि सीवीओ का कार्यभार ही उनका मुख्य काम होगा और बाकी काम अतिरिक्त प्रभार होगा। सूत्रों का कहना है कि जिस फाइल के पेज नंबर 67 पर हेल्थ सेक्रेटरी ने जे पी नड्डा की सारी बातें खारिज की हैं, उसी फाइल के पेज नंबर 71 पर नड्डा की मांगों का समर्थन करते हुए संजीव को हटा दिया गया। सवाल है कि मोदी के हस्तक्षेप के बाद भी क्या संजीव को हटाने के पीछे की वजह का पर्दाफाश होगा या समय के साथ बात ऐसे ही दब जाएगी?

Wednesday, October 8, 2014

पहले पत्नी की हत्या की और बाद में खुदकुशी

औलाद के सुख से वंचित एक शख्स ने सेक्टर-12 में अपने घर में सोमवार रात वाइफ की गला रेत कर हत्या करने के बाद खुदकुशी कर ली। देर रात फ्लैट में पति-पत्नी की लाशें पड़ी होने की सूचना के बाद मौके पर एसएसपी समेत तमाम आलाधिकारी पहुंचे। महिला का गला किचन नाइफ से रेता हुआ था जबकि कलाई भी कटी हुई थी। उधर, पति की भी कलाई कटी हुई है और वह फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला। मौके से पुलिस को दो स्यूसाइड नोट मिले हैं। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि संतान नहीं होने के चलते दोनों कई साल से परेशान थे।
एसएचओ सेक्टर-24 पंकज पंत ने बताया कि ग्रेटर नोएडा की एक दवा कंपनी में अकाउंटेंट रोहित वात्ताल अपनी वाइफ रश्मि के साथ सेक्टर-12 के डब्ल्यू-195 के टॉप फ्लोर पर किराये पर रह रहे थे। रोहित मूल रूप से जम्मू के रहने वाले थे। यह लोग करीब दस साल से इसी फ्लैट में रह रहे थे। शाम को सप्लाई का पानी आने पर यह लोग मकान मालिक की टंकी भी भरते थे। शाम करीब 6:30 बजे मकान मालकिन ने उन्हें पानी के बारे में पूछने के लिए फोन किया, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। रात करीब 10:30 बजे मकान मालिक का बेटा जब छत पर गया तो उसने फ्लैट में झांक कर देखा। अंदर रश्मि की लाश फर्श पर बिछे बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ी थी, जबकि अंदर वाले कमरे में रोहित फंदे से लटका हुआ था। मकान मालिक ने तुरंत पुलिस को उसकी सूचना दी। एसएचओ ने बताया कि हालात बता रहे हैं कि पति ने पहले पत्नी की हत्या की और बाद में खुदकुशी कर ली। महिला की हत्या करने के बाद रोहित वॉशरूम भी गया था। कमोड के पास खून से सने पैर के पंजे के निशान बने हैं।

फ्लैट में दो लाशें पड़ी होने की सूचना के बाद तमाम आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। मौके पर पुलिस को दो स्यूसाइड नोट बरामद हुए हैं, जो एक ही हैंडराइटिंग में हैं। इनमें लिखा है कि उनका सामान किसी जरूरतमंद को दे दिया जाए। उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है, लिहाजा किसी को परेशान न किया जाए। उनके शरीर को मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर दिया जाए। मकान मालिक के बारे में नोट में लिखा है कि वे अच्छे लोग हैं। उनके घर में ऐसा किया, इसके लिए माफ कर दें।

शवों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में महिला का गला और कलाई कटी होने और पति के फंदे पर लटकने के चलते मौत की बात सामने आई है। रोहित के माता-पिता की मौत हो चुकी है, जबकि उसकी तीनों बहनें शादीशुदा हैं। इनमें एक बहन, जीजा और साढ़ू बुधवार को नोएडा पहुंचे और कानूनी औपचारिकता पूरी की। इन्होंने पुलिस को बताया है कि दोनों संतान नहीं होने के चलते कई दिनों से परेशान थे। 

Tuesday, October 7, 2014

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास 1.26 करोड़ रुपए की संपत्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास 1.26 करोड़ रुपए की संपत्ति है जबकि रक्षा और वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी कैबिनेट के सबसे धनी मंत्री हैं और उनके पास 72.10 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के अन्य 44 सदस्यों द्वारा घोषित संपत्ति एवं देनदारियों के ब्योरे के मुताबिक केंद्रीय मंत्रियों में शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू के पास सबसे कम 20.45 लाख रुपए की संपत्ति है। इन ब्योरों को सोमवार को सार्वजनिक किया गया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के पास 37.68 करोड़ रुपए की संपत्ति है जबकि कोयला एवं बिजली मंत्री पीयूष गोयल के पास 31.67 करोड़ रुपए और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला के पास 29.70 करोड़ रुपए की संपत्ति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कुल 22 कैबिनेट मंत्रियों में 17 मंत्री करोड़पति हैं।
मंत्री जो करोड़पति नहीं हैं, उस सूची में 39.88 लाख रुपए के साथ खाद्य मंत्री रामविलास पासवान का भी नाम है। इसके साथ ही, श्रम एवं रोजगार मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पास 44.90 लाख रुपए, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के पास 48.54 लाख रुपए जबकि रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार के पास 60.62 लाख रुपए की संपत्ति है। नायडू के पास 20.45 लाख रुपए की संपत्ति है।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पास 2.56 करोड़ रुपए की संपत्ति है वहीं, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास 2.73 करोड़ रुपए की संपत्ति है। इसके अलावा हरियाणा के पलवल में कुछ कृषि भूमि है। कानून एवं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के पास 14.91 करोड़ रुपए की संपत्ति है जबकि परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के पास 3.34 करोड़ रुपए की संपत्ति है। उमा भारती के पास 1.62 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
पीएम कैबिनेट के अन्य मंत्रियों में, आदिवासी मामलों के मंत्री जुएल उरांव के पास 1.77 करोड़ रुपए, कलराज मिश्र के पास 72.11 लाख रुपए और प्रकाश जावडेकर के पास 1.05 करोड़ रुपए की संपत्ति है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह 2.47 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के पास 4.15 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
जनरल वी के सिंह ने 68.76 लाख रुपए की संपत्ति की घोषणा की है जबकि निर्मला सीतारमण के पास 1.03 करोड़ रुपए की संपत्ति है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के पास 2.67 करोड़ रुपए व गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू के पास 66.65 लाख रुपए की संपत्ति है।

Saturday, October 4, 2014

भगदड़ में 33 लोगों की मौत

बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में शुक्रवार रात दशहरे पर रावण दहन के दौरान मची भगदड़ में 33 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 लोग घायल हो गए। मृतकों की तादाद बढ़ने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बिजली के पोल में स्पार्क होने से जोरदार आवाज पैदा हुई, जिससे कई लोगों को लगा कि बम धमाका हुआ है। इसके बाद मैदान में भगदड़ मच गई।
बिहार के गृह सचिव और एडीजी गुप्तेश्वर पांडे ने भगदड़ में अभी तक 33 लोगों की मौत की खबर की पुष्टि की है। इस भगदड़ में घायल हुए लोगों को पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है। मरने वालों ने महिलाओं और बच्चों की तादाद सबसे अधिक है। केंद्र सरकार ने पीएम राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। पटना हादसे के बाद हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

शुक्रवार को गांधी मैदान में हर साल की तरह विजयादशमी के दौरान रावण दहन का आयोजन किया गया था। लोग पूरे परिवार के साथ मेले में शामिल होने के लिए आए थे। बताया जा रहा है कि मेले में करीब 5 लाख लोग आए थे। लेकिन मेले के खत्म होने के ठीक बाद मची भगदड़ ने रंग में भंग डाल दिया। चश्मदीदों के मुताबिक रावण दहन के दौरान जब लोग घरों की ओर लौट रहे थे, उसी समय यह भगदड़ मची। लोग बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे, जिससे लोग कुचलते चले गए। इस हादसे का शिकार सबसे ज्यादा महिलाएं और बच्चे हुए।
इस भगदड़ के दौरान कई लोग अपने परिजनों और बच्चों से भी बिछड़ गए। बच्चों की तलाश में बिलखते परिजन भगदड़ के बाद उन्हें इधर-उधर तलाशते रहे। वहीं परिजनों से बिछड़े कई बच्चे गांधी मैदान में एक तरफ खड़े रोते-बिलखते मिले। वहीं दूसरी तरफ गांधी मैदान में जहां-तहां बिखरे जूते चप्पल और सामान भगदड़ की भयावहता की गवाही दे रहे हैं।
पटना के गांधी मैदान में भगदड़ के बाद का दृश्य बेहद हिला देने वाला था। हरी साड़ी पहने एक महिला मैदान पर बेसुध होकर पड़ी थी, वहीं छोटे-छोटे बच्चों के चप्पल जहां-तहां बिखरे पड़े थे। हादसे के ठीक बाद लोग खुद ही घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुट गए। कई लोग बेसुध बच्चों को लेकर अस्पताल की ओर दौड़ते दिखाई दिए।

Wednesday, October 1, 2014

हर पखवाड़े रेडियो के जरिये लोगों से संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय किया है कि वह हर पखवाड़े रेडियो के जरिये लोगों से संवाद करेंगे। उनके इस फैसले से आकाशवाणी को अपनी रिब्रांडिंग होने की उम्मीद दिख रही है। आकाशवाणी के जरिये लोगों से पीएम की बातचीत की शुरुआत 3 अक्टूबर से होगी। 
जब देश में मास कम्युनिकेशन के साधनों की कमी थी, उस वक्त आकाशवाणी ही लोगों के लिए सूचना का बड़ा स्रोत हुआ करता था। हालांकि, पहले दूरदर्शन, फिर प्राइवेट टीवी चैनलों और बाद में प्राइवेट एफएम रेडियो ने इस सरकारी रेडियो ब्रॉडकास्टर को हाशिये पर धकेल दिया। राजनेता जहां टीवी के जरिये अपनी बात रखना पसंद करते हैं, वहीं रेडियो एंटरटेनमेंट के नाम पर लोगों ने प्राइवेट एफएम चैनलों से नाता जोड़ लिया है। 

पीएम ने केवल आकाशवाणी के जरिये लोगों से बात करने का जो फैसला किया है, उससे इस सरकारी रेडियो ब्रॉडकास्टर की ओर लोगों का ध्यान जरूर मुड़ेगा। आकाशवाणी ने भी इसके लिए पूरी तैयारी में है। इससे वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि पीएम के सरकारी आवास 7 रेसकोर्स रोड में आकाशवाणी का एक स्टूडियो बनाया जा रहा है। यहां उसी तरह की सुविधाएं होंगी, जो अमेरिका के राष्ट्रपति के ओवल ऑफिस में हैं। 
एक अधिकारी ने बताया, 'ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा चुका है।' पीएम की यह चैट तकरीबन पूरे देश में सुनी जाएगी। आकाशवाणी की ब्रैंड इमेज भले ही कमजोर हुई हो, यह अब भी देश में सबसे ज्यादा एरिया कवर करता है। ऑल इंडिया रेडियो की पहुंच देश की 99.20% आबादी तक है। देश के 92.6% भूभाग को यह कवर करता है। 
एआईआर के डायरेक्टर जनरल एफ शहरयार ने कहा, 'प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के मौके पर या कोई आपदा आने की स्थिति में ही रेडियो का उपयोग करते थे। इस बार मामला अलग है। हमें बताया गया है कि पीएम हर पखवाड़े एक बार आकाशवाणी के जरिये लोगों से बातचीत करेंगे।' इस काम में दूरदर्शन भी हाथ बंटाएगा। देश के 90% हिस्से तक पहुंच रखने वाला दूरदर्शन एआईआर की ऑडियो फीड प्रसारित करेगा। 
अधिकारियों ने बताया कि प्राइवेट एफएम चैनल भी एआईआर की फीड प्रसारित कर सकते हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। रेडियो के जरिये नियमित रूप से संवाद की शुरुआत अमेरिका के प्रेसिडेंट फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने की थी। तब रेडियो की वही हैसियत थी, जो आज टीवी की है। महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के असर से जूझ रहे अमेरिकियों से बातचीत में रूजवेल्ट ने रेडियो को जरिया बनाया था। अमेरिकी प्रेजिडेंट रोनाल्ड रीगन ने 1982 में इस परंपरा को दोबारा शुरू किया। मौजूदा अमेरिकी प्रेजिडेंट बराक ओबामा हर हफ्ते विडियो चैट करते हैं।