Monday, July 4, 2011

अब तक मिली वस्तुओं की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये आंकी गई

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने से बेशुमार बेशकीमती चीजें मिलने का सिलसिला जारी है। अब तक मिली वस्तुओं की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। मंदिर के 6 में से 5 चैंबर खोले जा चुके हैं। छठा चैंबर अभी खुलना बाकी है। पहले खुल चुके एक चैंबर की सोमवार को फिर से तलाशी ली जाएगी। हालांकि इसके बाद यह बहस शुरू हो गई है कि इस शाही संपदा को सुरक्षित कैसे रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सात लोगों का पैनल मंदिर के खजाने की लिस्ट बना रहा है। इसमें हाई कोर्ट के दो पूर्व जज हैं। 27 जून से चल रही यह कवायद रविवार को एक दिन के लिए रोक दी गई। मंदिर के तहखाने में ' ए ' से लेकर ' एफ ' तक छह तिजोरियां हैं। इनमें से दो पिछले 150 साल से नहीं खुली थीं। फिलहाल तिजोरी ' बी ' को खोलने के बारे में जरूरी निर्देश लेने पैनल के एक मेंबर दिल्ली आए हैं। केरल के मुख्यमंत्री ने मंदिर को सुरक्षा देने के लिए रविवार शाम को हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। मंदिर से बड़ी मात्रा में सोने के गहने , सोने - चांदी के सिक्के , जवाहरात जड़े मुकुट , मूर्तियां वगैरह मिली हैं। कुछ नेकलेस तो नौ फुट लंबे और दस किलो वजनी हैं। यह खजाना त्रावणकोर के शाही घराने ने मंदिर में संग्रहीत कर रखा था। यहां विजयनगर साम्राज्य और यूरोपीय देशों के सिक्के भी मिले हैं , जो शायद उपहार में मिले थे। आजादी के समय इलाके के बाकी मंदिर तो त्रावणकोर देवस्थानम बोर्ड को सौंप दिए गए लेकिन राजघराने ने भारत सरकार से समझौता करके पद्मनाभस्वामी मंदिर का नियंत्रण अपने हाथ में रखा। इतिहासकारों के बीच चर्चा है कि मंदिर से इतनी दौलत मिलने से पता चलता है कि इसकी देखभाल करने वाला शाही घराना कितना ईमानदार रहा है। कई उदाहरण हैं , जहां राजघरानों ने अपने नियंत्रण वाले मंदिरों की संपत्ति को ऐशोआराम में उड़ा दिया या उसे लुटेरों ने लूट लिया। कुछ इतिहासकारों और वीएचपी जैसे संगठनों ने इस विचार का विरोध किया है कि मंदिर की दौलत को सरकार को दे दिया जाए। इन लोगों को आशंका है कि इससे मंदिर में अव्यवस्था फैल जाएगी। इसकी जगह कुछ लोगों ने मंदिर में एक म्यूजियम खोलने की बात कही है जिसमें खजाने की चुनिंदा चीजें रखी जाएं। इस दौलत का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करने की बात कहने वाले एक तर्कशास्त्री यू . कलानाथन के घर पर कुछ लोगों ने हमला बोल दिया। मलप्पुरम में स्थानीय नेता कलानाथन के घर पर शनिवार रात हमला हुआ। उनके घर की खिड़कियां और बाइक तोड़ दी गईं। हालांकि कोई घायल नहीं हुआ। कलानाथन ने एक चैनल पर बहस में कहा था कि मंदिर की संपत्ति का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए होना चाहिए।

Wednesday, June 29, 2011

प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने के सवाल पर कोई एतराज नहीं

मनमोहन सिंह ने खुद को कमजोर प्रधानमंत्री करार दिए जाने को विपक्ष का चालाकी भरा दुष्प्रचार करार दिया है। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन मंत्रिमंडल में मतभेद हैं। प्रिंट मीडिया के कुछ चुनिंदा संपादकों के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ब्लैक मनी, टैक्स चोरी और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सभी संभव उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह सब एक बार में ही नहीं हो सकता। उन्होंने रामदेव के समर्थकों पर रामलीला मैदान में हुई पुलिस कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण बताया लेकिन कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के ऑफिस में जासूसी पर किए गए सवाल के जवाब में मनमोहन ने कहा कि उन्होंने ऑफिस में संदिग्ध जासूसी की शिकायत की थी और मैंने इंटेलिजेंस ब्यूरो को जांच के आदेश दे दिए थे। अब यह अध्याय बंद हो चुका है। उन्होंने कहा, ' हमें एक मजबूत लोकपाल की जरूरत है, लेकिन यह रामबाण नहीं है। हमने लोकपाल के मामले में एक रास्ता ढूंढ निकाला है और आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। मुझे अपने आप को लोकपाल विधेयक के दायरे में लाने में कोई हिचक नहीं है लेकिन मेरे मंत्रिमंडल के कुछ सदस्य महसूस करते हैं कि प्रधानमंत्री के पद को लोकपाल के दायरे में लाने से अस्थिरता पैदा होगी। ' प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सिविल सोसायटी के लोगों से बात करेगी लेकिन कोई भी समूह इस बात पर जोर नहीं दे सकता कि उनके विचार अंतिम हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा जारी है लेकिन उन्होंने इस बात का खुलासा करने से इंकार कर दिया यह कब तक होगा। उन्होंने मीडिया की आलोचना करते हुए कहा कि यह ' आरोप लगाने वाला, अभियोजक और जज' बन गया है। मनमोहन ने यह भी कहा कि मुझे सोनिया गांधी से भरपूर सहयोग मिला, वह कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में बेहतरीन ढंगसे काम कर रही है।

Monday, June 20, 2011

मोदी कांग्रेस के युवराज पर भारी

एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक जनता अब केंद्र सरकार से आजिज आ चुकी है और उसे बदलना चाहती है। सर्वे के नतीजे से यह भी पता चला है कि वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तुलना में ज्यादातर लोग राहुल गांधी को बतौर पीएम देखना चाहते हैं। वहीं, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल के बीच जब वोटरों को चुनने का ऑप्शन दिया गया, तो मोदी कांग्रेस के युवराज पर भारी पड़ गए। लेंसऑनन्यूज डॉट कॉम ने 12 से16 जून के बीच 'मूड ऑफ द नैशन नाम' का यह सर्वे कराया। इसमें 14 राज्यों के 40 लोकसभा क्षेत्रों के लगभग चार हजार वोटरों ने हिस्सा लिया। सर्वे के मुताबिक लगभग दो तिहाई (63%) वोटर केंद्र में सरकार बदलने के पक्ष में हैं, जबकि इनके मुकाबले में करीब आधे लोग (32 %) ही मनमोहन सरकार चाहते हैं। लोगों से पूछा गया कि मनमोहन सिंह और राहुल गांधी में से किसे पीएम के रूप में देखना चाहते हैं। इस सवाल के जवाब में 46% वोट राहुल गांधी को और 34% वोट मनमोहन सिंह को मिले। सर्वे में एक चौंकाने वाला तथ्य भी है। इसके मुताबिक राहुल गांधी और बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी में 53 % मतदाताओं ने मोदी को बेहतर पीएम के रूप में चुना। राहुल गांधी 38% वोट लेकर उनसे काफी पीछे रहे। सर्वे के मुताबिक शहरी इलाकों और उच्च शिक्षित वर्गों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को लेकर निराशा है। यह वही तबका है, जो 2009 में कांग्रेस के भारी समर्थन में था। अमेठी लोकसभा सीट से 41 वर्षीय सांसद राहुल को प्रधानमंत्री बनाने के समर्थकों में मुस्लिम महिलाएं, किसान और मजदूरों की संख्या अधिक है। यही तबका कांग्रेस का वोट बैंक भी कहलाता है।

Thursday, June 16, 2011

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर - मंतर से शुरू हुई मुहिम को दोबारा शुरू कर सकते हैं।

मजबूत लोकपाल कानून बनवाने के लिए आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर - मंतर से शुरू हुई मुहिम को दोबारा शुरू कर सकते हैं। हजारे ने कहा कि वह लोकपाल बिल को लेकर सरकार के रवैये से निराश हैं। उन्होंने सरकार पर अपने वायदे से पलटने का आरोप लगाया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग को लेकर जॉइंट कमिटी में सरकार और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। अन्ना ने कहा कि उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार एक मजबूत लोकपाल कानून बनाने की इच्छुक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दो अलग-अलग ड्राफ्ट कैबिनेट को भेजे जाने का विचार हास्यास्पद है और जॉइंट ड्राफ्टिंग कमिटी बनाए जाने के कारण के विपरीत है। हजारे ने कहा, 'यदि सरकार को दो ड्राफ्ट ही भेजने थे तो उसने जॉइंट पैनल बनाने में वक्त क्यों ज़ाया किया? दो ड्राफ्ट (एक सरकार का और दूसरा सिविल सोसायटी का) तो पहले से ही मौजूद थे, उन्हें ही कैबिनेट को भेज दिया जाता।' केंद्र सरकार को कमजोर लोकपाल कानून बनाने के खिलाफ चेतावनी देते हुए हजारे ने कहा कि सिविल सोसायटी इसे कमजोर करने की कोशिश को कतई स्वीकार नहीं करेगी। हजारे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि मजबूत लोकपाल कानून के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और अगर सरकार कमजोर कानून बनाने की कोशिश करेगी तो वह फिर से आंदोलन का रास्ता पकड़ेंगे।

Wednesday, June 8, 2011

16 अगस्त से जंतर मंतर पर देश की आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू

अन्ना हजारे ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के मुद्दे पर जनता का साथ नहीं दिया तो वह 16 अगस्त से जंतर मंतर पर देश की आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त से यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक मेरे शरीर में प्राण रहेंगे। हम तब तक लड़ेंगे, जब तक सत्ता पूरी तरह लोगों के हाथ में नहीं होगी। हमें व्यवस्था में बदलाव के लिए आजादी के दूसरे आंदोलन की जरूरत है। जनता ही सांसदों और विधायकों को चुनती है। सरकार को सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए ग्राम सभाओं को ज्यादा से ज्यादा अधिकार देने चाहिए।' उन्होंने कहा, 'सरकार और हम अलग नहीं हैं। एक तरह से हम एक ही हैं। सरकार के दिमाग में खुद के आका होने का भाव है। वह खुद को मालिक समझती है, जबकि उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बनने के बाद देश की जनता इस देश की मालिक हो गई है।' बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई की निंदा करते हुए हजारे ने कहा,'रात को सोते लोगों पर लाठियां चलाना मानवता पर कलंक लगाने और लोकशाही का गला घोंटने जैसी घटना है। इसके विरोध में आज हम यहां एकत्र हुए हैं। रामलीला मैदानपर सिर्फ गोली ही नहीं चली। बाकी सारा अन्याय और अत्याचार जलियांवाला बाग की घटना की याद दिलाता है।' उन्होंने कहा, 'हम लोकपाल बिल के लिए जॉइंट ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठकें कर रहे हैं। लेकिन सरकार किसी न किसी मुद्दे पर अड़ंगा डाल देती है। अगर सरकार का यही रुख रहा तो हम अप्रैल में हुए आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन करेंगे। हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है।' हजारे ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, 'हम पर झूठे आरोप लगाए गए। सरकार ने हमारे साथी कार्यकर्ता केजरीवाल के पीछे कुछ अधिकारियों को भी लगा दिया। सरकार का यह बर्ताव ठीक नहीं है। अगर सरकार को हम पर संदेह है तो वह चोरी छिपे कोशिशें करने के बजाय हमसे आमने सामने बात करे।' अपने सादगीपूर्ण जीवन के बारे में अन्ना ने कहा, 'मैं एक मंदिर में रहता हूं। मेरे पास महज खाने की एक थाली और बिस्तर है। मेरा कोई बड़ा बैंक बैलेंस नहीं है। मैं अब तक गुंडों से लड़ा हूं और अब भी गुंडों से ही लड़ रहा हूं। मैं अब तक छह मंत्रियों की छुट्टी करा चुका हूं और मेरी कोशिशों के चलते 400 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। एक पूर्व मंत्री ने मुझे मारने के लिए 30 लाख रुपये की सुपारी दी थी।' उन्होंने कहा, 'यह सब बताने के मायने यह हैं कि हिंसा का रास्ता अपनाए बिना ही, यह सब किया जा सकता है। आपको एक बीज बन कर मिट्टी से जुड़ना होगा। तभी आप आंदोलन खड़ाकर पाएंगे।'

Friday, June 3, 2011

बॉलिवुड ऐक्टर शाहरुख खान ने कहा कि बाबा की मुहिम राजनीति से प्रेरित

बॉलिवुड ऐक्टर शाहरुख खान ने कहा है कि वह ब्लैकमनी के खिलाफ रामदेव के अभियान को सपोर्ट नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बाबा की मुहिम राजनीति से प्रेरित है। वह नेता बनना चाहते हैं। अपनी फिल्म ' रा.वन ' के प्रमोशन से जुड़े एक कार्यक्रम के सिलसिले में यहां आए शाहरुख से जब पूछा गया कि क्या वह बाबा रामदेव के अनशन को समर्थन देते हैं, तो उन्होंने साफ-साफ कहा, ' कोई सपोर्ट नहीं करूंगा... उनका एजेंडा है... जैसे ही कोई नेता बन जाता है वह ये सब करने लगता है। ' शाहरुख ने कहा, ' जिसका जो काम है, वही करना चाहिए। अगर कोई नेता बनकर ये सब करना चाहता है तो कोई मुद्दा उठाने का यह सही तरीका नहीं है। ' 2 जी घोटाले से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से वह निराश हैं। लेकिन, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राजनीति में आना चाहेंगे, तो उन्होंने इसका खंडन करते हुए कहा, ' आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि मैं राजनीति में जाऊं, आप यह क्यों नहीं सोचते कि कोई नेता फिल्म इंडस्ट्री में आए। ' उन्होंने कहा, ' मैं एक स्वार्थी आदमी हूं और चाहता हूं कि मेरे फैंस और दूसरे लोग मेरे काम की तारीफ करते रहें। ' उन्होंने कहा कि वह राजनीति नहीं समझते।

एक-दो को छोड़कर ज्यादातर मुद्दों पर सरकार के साथ सहमति

भ्रष्टाचार और ब्लैक मनी के मुद्दे पर 4 जून से अनशन का ऐलान करने वाले योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि एक-दो को छोड़कर ज्यादातर मुद्दों पर सरकार के साथ सहमति बन गई है। उन्होंने कहा, ' मैं किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हूं। मैं तो दलों से अपील कर रहा हूं कि वे हमारे साथ जुड़ें। ' रामलीला मैदान पहुंचे लोगों का धन्यवाद देते हुए रामदेव ने कहा कि भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट लोगों का कोई धर्म नहीं होता है, वे दानव की तरह हैं। मैदान में जमा लोगों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि वह चुप नहीं बैठेंगे और शनिवार से अनशन शुरू करेंगे।