मजबूत लोकपाल कानून बनवाने के लिए आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर - मंतर से शुरू हुई मुहिम को दोबारा शुरू कर सकते हैं। हजारे ने कहा कि वह लोकपाल बिल को लेकर सरकार के रवैये से निराश हैं। उन्होंने सरकार पर अपने वायदे से पलटने का आरोप लगाया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग को लेकर जॉइंट कमिटी में सरकार और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। अन्ना ने कहा कि उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार एक मजबूत लोकपाल कानून बनाने की इच्छुक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दो अलग-अलग ड्राफ्ट कैबिनेट को भेजे जाने का विचार हास्यास्पद है और जॉइंट ड्राफ्टिंग कमिटी बनाए जाने के कारण के विपरीत है। हजारे ने कहा, 'यदि सरकार को दो ड्राफ्ट ही भेजने थे तो उसने जॉइंट पैनल बनाने में वक्त क्यों ज़ाया किया? दो ड्राफ्ट (एक सरकार का और दूसरा सिविल सोसायटी का) तो पहले से ही मौजूद थे, उन्हें ही कैबिनेट को भेज दिया जाता।' केंद्र सरकार को कमजोर लोकपाल कानून बनाने के खिलाफ चेतावनी देते हुए हजारे ने कहा कि सिविल सोसायटी इसे कमजोर करने की कोशिश को कतई स्वीकार नहीं करेगी। हजारे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि मजबूत लोकपाल कानून के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और अगर सरकार कमजोर कानून बनाने की कोशिश करेगी तो वह फिर से आंदोलन का रास्ता पकड़ेंगे।
Thursday, June 16, 2011
Wednesday, June 8, 2011
16 अगस्त से जंतर मंतर पर देश की आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू
अन्ना हजारे ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के मुद्दे पर जनता का साथ नहीं दिया तो वह 16 अगस्त से जंतर मंतर पर देश की आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त से यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक मेरे शरीर में प्राण रहेंगे। हम तब तक लड़ेंगे, जब तक सत्ता पूरी तरह लोगों के हाथ में नहीं होगी। हमें व्यवस्था में बदलाव के लिए आजादी के दूसरे आंदोलन की जरूरत है। जनता ही सांसदों और विधायकों को चुनती है। सरकार को सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए ग्राम सभाओं को ज्यादा से ज्यादा अधिकार देने चाहिए।' उन्होंने कहा, 'सरकार और हम अलग नहीं हैं। एक तरह से हम एक ही हैं। सरकार के दिमाग में खुद के आका होने का भाव है। वह खुद को मालिक समझती है, जबकि उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बनने के बाद देश की जनता इस देश की मालिक हो गई है।' बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई की निंदा करते हुए हजारे ने कहा,'रात को सोते लोगों पर लाठियां चलाना मानवता पर कलंक लगाने और लोकशाही का गला घोंटने जैसी घटना है। इसके विरोध में आज हम यहां एकत्र हुए हैं। रामलीला मैदानपर सिर्फ गोली ही नहीं चली। बाकी सारा अन्याय और अत्याचार जलियांवाला बाग की घटना की याद दिलाता है।' उन्होंने कहा, 'हम लोकपाल बिल के लिए जॉइंट ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठकें कर रहे हैं। लेकिन सरकार किसी न किसी मुद्दे पर अड़ंगा डाल देती है। अगर सरकार का यही रुख रहा तो हम अप्रैल में हुए आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन करेंगे। हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है।' हजारे ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, 'हम पर झूठे आरोप लगाए गए। सरकार ने हमारे साथी कार्यकर्ता केजरीवाल के पीछे कुछ अधिकारियों को भी लगा दिया। सरकार का यह बर्ताव ठीक नहीं है। अगर सरकार को हम पर संदेह है तो वह चोरी छिपे कोशिशें करने के बजाय हमसे आमने सामने बात करे।' अपने सादगीपूर्ण जीवन के बारे में अन्ना ने कहा, 'मैं एक मंदिर में रहता हूं। मेरे पास महज खाने की एक थाली और बिस्तर है। मेरा कोई बड़ा बैंक बैलेंस नहीं है। मैं अब तक गुंडों से लड़ा हूं और अब भी गुंडों से ही लड़ रहा हूं। मैं अब तक छह मंत्रियों की छुट्टी करा चुका हूं और मेरी कोशिशों के चलते 400 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। एक पूर्व मंत्री ने मुझे मारने के लिए 30 लाख रुपये की सुपारी दी थी।' उन्होंने कहा, 'यह सब बताने के मायने यह हैं कि हिंसा का रास्ता अपनाए बिना ही, यह सब किया जा सकता है। आपको एक बीज बन कर मिट्टी से जुड़ना होगा। तभी आप आंदोलन खड़ाकर पाएंगे।'
Friday, June 3, 2011
बॉलिवुड ऐक्टर शाहरुख खान ने कहा कि बाबा की मुहिम राजनीति से प्रेरित
बॉलिवुड ऐक्टर शाहरुख खान ने कहा है कि वह ब्लैकमनी के खिलाफ रामदेव के अभियान को सपोर्ट नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बाबा की मुहिम राजनीति से प्रेरित है। वह नेता बनना चाहते हैं। अपनी फिल्म ' रा.वन ' के प्रमोशन से जुड़े एक कार्यक्रम के सिलसिले में यहां आए शाहरुख से जब पूछा गया कि क्या वह बाबा रामदेव के अनशन को समर्थन देते हैं, तो उन्होंने साफ-साफ कहा, ' कोई सपोर्ट नहीं करूंगा... उनका एजेंडा है... जैसे ही कोई नेता बन जाता है वह ये सब करने लगता है। ' शाहरुख ने कहा, ' जिसका जो काम है, वही करना चाहिए। अगर कोई नेता बनकर ये सब करना चाहता है तो कोई मुद्दा उठाने का यह सही तरीका नहीं है। ' 2 जी घोटाले से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से वह निराश हैं। लेकिन, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राजनीति में आना चाहेंगे, तो उन्होंने इसका खंडन करते हुए कहा, ' आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि मैं राजनीति में जाऊं, आप यह क्यों नहीं सोचते कि कोई नेता फिल्म इंडस्ट्री में आए। ' उन्होंने कहा, ' मैं एक स्वार्थी आदमी हूं और चाहता हूं कि मेरे फैंस और दूसरे लोग मेरे काम की तारीफ करते रहें। ' उन्होंने कहा कि वह राजनीति नहीं समझते।
एक-दो को छोड़कर ज्यादातर मुद्दों पर सरकार के साथ सहमति
Thursday, June 2, 2011
रामदेव विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर ''आश्वासनों'' की बजाय ''कार्रवाई'' की बात पर अड़े
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता योगगुरु बाबा रामदेव की चार जून से काले धन के मुद्दे पर अनशन पर बैठने की योजना से बने हालात पर आज यानी गुरुवार को चर्चा कर सकते हैं। बाबा रामदेव के मुद्दे पर पार्टी और सरकार के बीच झलके मतभेदों की पृष्ठभूमि में शाम को सोनिया की अध्यक्षता में कांग्रेस कोर समूह की बैठक होने वाली है। कोर समूह की बैठक आमतौर पर शुक्रवार को होती है लेकिन एक दिन पहले होने से इस बात का संकेत मिल रहा है कि रामदेव की अनशन की योजना पर पार्टी और सरकार में चिंता कायम है। बड़े नीतिगत मुद्दों पर फैसला करने वाले पार्टी के कोर समूह में प्रणव मुखर्जी, ए.के. एंटनी, पी. चिदंबरम और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल समेत कांग्रेस के आला नेता और सरकार के मंत्री शामिल हैं। कुछ दिन पहले राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में भी रामदेव के अनशन की योजना पर चर्चा की गयी थी और प्रधानमंत्री सिंह ने रामदेव को पत्र लिखकर उनसे अनशन पर नहीं जाने का आग्रह किया था। सिंह ने उन्हें भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने का वादा भी किया था। सरकार की ओर से बुधवार को यहां हवाईअड्डे पर बाबा रामदेव की अगवानी के लिए चार वरिष्ठ मंत्रियों को भेजे जाने के अभूतपूर्व कदम से कांग्रेस ने दूरी बनाई है और कहा कि यह 'अनावश्यक' था और पार्टी का इससे कुछ लेना- देना नहीं है। दरअसल, सरकार ने गुरुवार को रामदेव को मनाने के लिए मध्य प्रदेश से उनके यहां हवाईअड्डे पर पहुंचने के समय से पहले ही अपने आला मंत्रियों को भेज दिया था। कांग्रेस में टॉप सूत्रों के अनुसार, ''यहां से हवाईअड्डे तक जाने की पूरी कवायद से पार्टी का किसी भी तरह का संबंध नहीं है।'' सरकार चाहती है कि फिर से उस तरह की स्थिति पैदा न हो जो अप्रैल में लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर अन्ना हजारे के आंदोलन से पैदा हुई थी। सरकार के उस समय के आश्वासन का तत्काल कोई परिणाम निकलता प्रतीत नहीं हो रहा। बाबा रामदेव विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर ''आश्वासनों'' की बजाय ''कार्रवाई'' की बात पर अड़े हैं। उधर अन्ना हजारे ने कहा है कि प्रत्येक पदाधिकारी को लोकपाल विधेयक के दायरे में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार तभी हरकत में आई है जब रामदेव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह चार जून से अपना आंदोलन शुरू करेंगे। हजारे ने कहा, ''इतने दिन से हम मांग कर रहे हैं, सरकार ने हमारी क्यों नहीं सुनी। अब सरकार सिर्फ इस वजह से दौड़ रही है कि अनशन पर बैठने का समय आ गया है।'' उन्होंने कहा, ''बाबा रामदेव काफी दिन से काले धन को वापस लाने की मांग उठा रहे हैं। सरकार ने इस मुद्दे पर कुछ करने की क्यों नहीं सोची। लोग अब यह जानना चाहते हैं कि सरकार के क्या इरादे हैं।'' गांधीवादी कार्यकर्ता हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। हजारे ने कहा, ''अब हम और खोखले आश्वासन या मौखिक वायदे नहीं चाहते। हम भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में तब तक लड़ाई जारी रहेगी जब तक कि हमें वह नहीं मिल जाता जो हम चाहते हैं।''
Tuesday, May 31, 2011
बैठक सरकार और सिविल सोसायटी के मेंबरों के बीच टकराव में तब्दील
सरकार के रुख से नाराज अन्ना हजारे के नेतृत्व वाली सिविल सोसयटी एक बार फिर सड़कों का रुख करने के मूड में है। प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग कमिटी की सोमवार को हुई बैठक सरकार और सिविल सोसायटी के मेंबरों के बीच टकराव में तब्दील हो गई। सरकार ने पीएम ऑफिस, जुडिशरी और संसद में सांसदों की करप्ट करतूतों को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग खारिज कर दी। इससे भड़ककर सिविल सोसायटी के सदस्य अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और संतोष हेगड़े ने कमिटी से वॉकआउट करने और फिर से सड़कों पर उतरने की धमकी दी है। सरकार ने इनकी मांगों को यह कहकर खारिज कर दिया कि पीएम को इस दायरे में लाना उनके पद को महत्वहीन बना देगा और अगर उनके खिलाफ जांच होती है तो वह शासन करने और अहम फैसले लेने का हक खो देंगे। कपिल सिब्बल का कहना है कि इस मामले में राज्य सरकारों और राजनीतिक पार्टियों से बात करना जरूरी है। उसके बाद ही 6 जून को होने वाली अगली मीटिंग में इस मसले पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार को लग रहा है कि अन्ना के आंदोलन का असर अब कम होता दिख रहा है इसलिए उसने अब ज्यादा दबाव में न आने का मन बना लिया है। इसी लिहाज से अब तक सिर्फ टीम अन्ना से बात करने के पक्ष में रही सरकार ने विवाद के मामलों पर राज्य सरकारों और दूसरे राजनीतिक दलों आदि की राय लेने की बात कह दी है। उधर, सरकार की इस मंशा को भांपते हुए अन्ना फिर से सड़क पर उतरने की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि इससे पहले ये कुछ और बैठकों में भाग लेंगे। सोमवार को कमिटी के सह- अध्यक्ष शांति भूषण ने कमिटी में मौजूद मंत्रियों पर लोकपाल को लेकर गंभीर नहीं होने के आरोप लगाते हुए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से दखल देने की मांग की। कमिटी की बैठक के दौरान अहम बिंदुओं पर पहली बार सरकार का पक्ष रख रहे प्रणब मुखर्जी ने साफ कर दिया कि जिस तरह के अधिकार संपन्न लोकपाल की मांग अन्ना कर रहे हैं, उसके लिए सरकार तैयार नहीं है। सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पूरी तरह से लोकपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखने का प्रस्ताव रख दिया। हालांकि, सरकार ने अन्ना के आंदोलन से पहले जो लोकपाल का मसौदा अपनी तरफ से बनाया था, उसमें कुछ मामलों को छोड़ कर प्रधानमंत्री कार्यालय को इसके दायरे में रखा गया था। इसी तरह सरकार ने न्यायपालिका, सांसदों व जॉइंट सेक्रेटरी से नीचे स्तर के सरकारी अधिकारियों को भी इसके दायरे में लाने से इनकार कर दिया इन पांच मुद्दों पर अटकी बात - प्रधानमंत्री के ऑफिस को लोकपाल के दायरे में लाने पर नहीं मानी सरकार - जुडिशरी को लोकपाल के तहत लाने का मसला उठा, मगर सरकार ने खारिज की मांग - संसद में सांसदों के करप्ट व्यवहार को लोकपाल के दायरे में लाने का मुद्दा भी नामंजूर हुआ - जॉइंट सेक्रेट्री से नीचे के रैंक वाले अफसरों को लोकपाल के तहत लाने पर भी राजी नहीं हुई सरकार - सीवीसी और सीबीआई को लोकपाल में मिलाने के भी खिलाफ है सरकार
Friday, May 27, 2011
गुजरात में भी भ्रष्टाचार
सुशासन के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि गुजरात में भी भ्रष्टाचार है। उन्होंने गुजरात में भी लोकपाल की मांग की है। जन लोकपाल बिल पर कामयाब अनशन के जरिए देश के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचनेवाले समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि गुजरात में भी भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा है कि गुजरात में भी लोकपाल होना चाहिए। अन्ना हजारे बुधवार को अचानक अहमदाबाद पहुंचे और वहां पर गुजरी बाजार के स्लमवासियों से मिले। अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन(एएमसी) ने बुधवार को की गई कार्रवाई के तहत इन स्लमवासियों के घरों को तोड़कर उन्हें बेघर कर दिया है। इन लोगों के दुख दर्द को सुनने के बाद अन्ना ने उन्हें समर्थन देने की बात कही। अन्ना हजारे के साथ अरविंद केजरीवाल और स्वामी अग्निवेश भी अहमदाबाद पहुंचे। स्वामी अग्निवेश ने भी राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, 'अफसरों ने जिस तरह यहां पर गरीब लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया है, वह निंदनीय है। मैं यह देखकर हैरान हूं कि गुजरात में किस तरह कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।' गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने कहा था कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से अपने-अपने राज्य में काम किया है, उससे दूसरे मुख्यमंत्रियों को सीखना चाहिए।
